आनन-फानन गलती तो सुधार ली गई, लेकिन सवाल यह उठाया जा रहा है कि आखिर यह गलती हुई कैसे? क्या विभाग के जिम्मेदार अफसरों को सरकार के मंत्रियों तक के बारे में कोई संवेदनशीलता नहीं है? क्या वे लगातार चर्चा में रहे राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रति भी सजग नहीं रहते? फाइलों की स्वीकृति की लंबी चेन होने के बावजूद शासन में किसी स्तर पर यह चूक क्यों नहीं पकड़ी गई? इन सवालों का जवाब देने से अफसर बच रहे हैं।