लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई में टीबी के इलाज के साथ ही मरीज की भर्ती भी जल्द होगी। निदेशक प्रो. आरके धीमन ने इसके लिए नोडल अधिकारी और मेडिकल ऑफिसर ट्यूबरकुलोसिस ट्रीटमेंट नामित किया है।
दवा प्रतिरोधी (डीआर) टीबी के लिए नोडल सेंटर बनाए जाने के बावजूद संस्थान में दो साल में एक भी मरीज भर्ती नहीं किया गया है। अमर उजाला ने 20 जनवरी के अंक में यह मुद्दा उठाया था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया था और जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी ने पीजीआई प्रशासन को पत्र भेजा था। इसके बाद संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमन ने नोडल अधिकारी और मेडिकल ऑफिसर ट्यूबरकुलोसिस ट्रीटमेंट नामित कर दिया है।
इसके तहत डॉ. ऋचा मिश्रा को नोडल अधिकारी और डॉ. आलोक नाथ को मेडिकल ऑफिसर ट्यूबरकुलोसिस ट्रीटमेंट बनाया गया है। नए नामित अधिकारी टीबी से संबंधित सभी मामलों की देखरेख करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि मरीजों को संस्थान में ही समय पर और प्रभावी उपचार मिल सके। संस्थान का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द मरीजों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए, जिससे उन्हें बाहर भटकना न पड़े।
फिलहाल दूसरे संस्थानों में भेजे जा रहे हैं मरीज
टीबी की बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने सभी चिकित्सा संस्थानों में दवा प्रतिरोधी टीबी के नोडल सेंटर बनाने का निर्देश दिया था। इसके तहत दिसंबर 2023 में केजीएमयू, लोहिया संस्थान और संजय गांधी पीजीआई समेत प्रदेश में 24 नोडल केंद्र बनाए गए। गाइडलाइन के अनुसार सामान्य टीबी सेंटर को न्यूनतम चार और नोडल सेंटर को न्यूनतम 12 बेड पर मरीज भर्ती करने हैं। इसके बावजूद पीजीआई ने दवा प्रतिरोधी टीबी का एक भी मरीज भर्ती नहीं किया।