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जनाब तो बादशाह भी हैं और वजीर भी

Tue, 27 Aug 2013 01:50 PM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
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टेस्ट ट्यूब व बीकर वाले महकमे के एक साहब के पास इन दिनों दो-दो पद हैं। महकमे के बादशाह भी खुद हैं और वजीर भी।
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सूबे की पिछली वजीरेआला ने ही उनके लिए यह व्यवस्था की थी। इसके लिए उन्होंने खूब लॉबीइंग की थी। इसके बाद पिछली हुकूमत में उन्हें यह प्रसाद भी मिल गया।

बादशाह के साथ-साथ वजीर का चार्ज मिलने के बाद से ही साहब के दोनों हाथों में लड्डू आ गए। अब वह कुछ भी करें, कोई रोकने-टोकने वाला नहीं है।

साहब बहुत खुश हैं। समय बदला और समय के साथ ही हुकूमत भी बदल गई। सूबे में नए वजीरेआला आ गए। अब साहब की डबल कुर्सियों पर किसी ने नजर लगा दी है।

इसलिए उनसे वजीर का ताज वापस लेने की चर्चाएं शुरू हो गईं हैं। साहब को ताज खिसकने की जैसे ही आहट हुई वे फौरन अपने धर्मगुरुओं की शरण में चले गए।

अपने भक्त के लिए धर्मगुरुओं ने भी पूरी जान लगा दी है। सत्ता के मंदिर में दस्तक देने के साथ ही यहां मौजूद देवी-देवताओं से धर्मगुरु अपने भक्त के लिए वरदान मांग रहे हैं।
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