कोई दफ्तर का चपरासी है तो कोई कुक, माली या स्वीपर। लेकिन अफसरों के घर पर इनसे नौकरों की तरह काम लिया जा रहा है। चपरासी सब्जी और रसोई गैस के सिलेंडर ढो रहा है तो माली चाय बनाने में लगा है।
स्वीपर से बगीचे की निराई-गुड़ाई कराई जा रही है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की एसोसिएशन के विरोध पर कोर्ट ने अफसरों को चेतावनी दी।
सूबे के विभिन्न जनपदों में पुलिस महकमे के चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की संख्या करीब 25,000 है। सूत्रों के मुताबिक इसमें से 9,000 कर्मचारी अफसरों के आवासों पर तैनात हैं।
आवास पर तैनात कर्मचारियों में सबसे ज्यादा ऑफिस प्यून हैं। कार्यालय के छोटे-छोटे काम के लिए हर दस मिनट में इनकी जरूरत पड़ती है लेकिन ये कर्मचारी अफसरों के घर पर ड्यूटी बजा रहे हैं।
कई प्यून ऐसे भी हैं जो कंप्यूटर पर काम करना जानते हैं। स्टाफ की कमी से जूझ रहे पुलिस महकमे के लिए ये बड़े काम के हैं। जरूरत पड़ने पर अफसर इनसे कंप्यूटर ऑपरेटर का काम भी ले लेते हैं।
पुलिस विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एसोसिएशन के अध्यक्ष कृष्ण मुरारी पाल बताते हैं कि हाईकोर्ट में रिट के बाद पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद ने अफसरों के लिए चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के मानक तय कर दिए थे।
अफसरों के शोषण से क्षुब्ध एसोसिएशन ने बीती 24 मार्च को कोर्ट में उन अफसरों की सूची सौंपी थी जिनके आवासों पर अब भी निर्धारित मानक से अधिक चतुर्थ श्रेणी कर्मी तैनात हैं। कोर्ट ने दो सप्ताह में अतिरिक्त कर्मियों को हटाने का आदेश दिया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।