फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गड्ढा मुक्त रोड: शुरू में कर दिए बड़े-बड़े वादे, अब सता रहा कार्रवाई का डर

Mon, 12 Jun 2017 11:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
योगी सरकार के सत्ता संभालते ही पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने दावे तो बड़े-बड़े कर दिए कि दो महीने से भी कम समय में सभी सड़कों को दुरुस्त कर देंगे, पर कराए गए कामों के सत्यापन कराने की घोषणा होते ही उन्हें कार्रवाई का डर सताने लगा। 
विज्ञापन


यही वजह है कि वे अब मंडलीय समीक्षा बैठकों में साफ तौर पर कह रहे हैं कि जिन सड़कों को विशेष मरम्मत की जरूरत है, उन्हें ठीक नहीं किया जा सकता। प्रदेश में इस तरह की सड़कों की कुल लंबाई शुरुआत में 13151 किलोमीटर और अब 10116 किलोमीटर बताई जा रही है।

15 जून तक सभी सड़कों को गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य मिलने पर पीडब्ल्यूडी ने इस अभियान को तीन हिस्सों में बांटा। इसके तहत 44333 किलोमीटर लंबी सड़कों में पैच मरम्मत, 28457 किलोमीटर लंबी सड़कों में साधारण पैच मरम्मत के साथ लेपन और 13151 किलोमीटर लंबी सड़कों को पूरी तरह से ध्वस्त बताया गया। 
विज्ञापन


अधिकारियों ने सरकार के सामने रखी कार्ययोजना में निर्धारित तिथि तक सभी सड़कों को दुरुस्त कर देने का वादा किया। अभियान के बीच में ही उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कराए गए कामों का विभिन्न एजेंसियों और अन्य विभागों के इंजीनियरों से सत्यापन कराने की घोषणा भी की।
 
इससे इंजीनियरों में खलबली मच गई। दरअसल वे मानकर चल रहे थे कि 15 जून तक सभी सड़कों को गड्ढा मुक्त करने की जोनवार रिपोर्ट भेज देंगे और उसके बाद मानसून आ जाएगा। चूंकि इस साल मौसम विभाग ने मानसून अच्छा रहने की भविष्यवाणी की है, इसलिए प्रदेश के 38 जिलों में सड़कों पर पानी आना भी तय है। 
विज्ञापन

नहीं चलेगा बरसात का बहाना

डेमो प‌िक - फोटो : amar ujala
ऐसे में यह बहाना आसानी से बनाया जा सकता था कि पानी आया और सड़क पर फिर गड्ढे हो गए। लेकिन, काम के सत्यापन के लिए टीम भेजने पर स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि भी सच्चाई सामने रख देंगे।

यही वजह है कि शुरुआत में सीएम के सामने सही स्थिति न रखने वाले अधिकारी अब हर समीक्षा बैठक में बता रहे हैं कि जिन सड़कों को विशेष मरम्मत के साथ लेपन की जरूरत है, उन्हें दुरुस्त नहीं किया जा सकता। 

ये सड़कें इतनी ज्यादा टूटी हैं कि इनके बड़े हिस्से पर पत्थर डालने की जरूरत है। इन्हें ठीक करने के लिए विभाग को कम से कम 13151 करोड़ रुपये की जरूरत है। यही वजह है कि इस श्रेणी में रखी र्गईं महज दो हजार किलोमीटर लंबी सड़कें ही अभी तक सुधारी जा सकी हैं। 

हालांकि, विभाग का दावा है कि वह पैच मरम्मत और सामान्य मरम्मत के साथ नवीनीकरण की जरूरत वाली सभी सड़कों का निर्धारित समय सीमा के भीतर गड्ढामुक्त कर देगा। ज्यादातर सड़कें इन्हीं दो श्रेणियों में हैं।

झांसी में 2.4 किमी सड़क को 2400 किमी. दिखा देने से गड़बड़ाए आंकड़े
पीडब्ल्यूडी ने गड्ढामुक्त अभियान में शामिल सड़कों के आंकड़े को संशोधित किया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि झांसी मंडल ने शुरुआत में जो रिपोर्ट भेजी थी, उसमें 2.4 किलोमीटर लंबी सड़क को 2400 किलोमीटर दिखा दिया। 
ऐसा प्रिंटिंग में गलती के कारण हुआ। जब यह गलती पकड़ में आई तो विशेष मरम्मत की श्रेणी में जहां पहले 13151 किलोमीटर लंबी सड़कें शामिल थीं, वो घटकर 10116 किलोमीटर रह गईं। इसके अलावा मध्य जोन समेत कई जोन के अभियान में कुछ और सड़कों को भी जोड़ा गया है। 

इस तरह से संशोधित आंकड़ों के अनुसार अब कुल 85160.63 किलोमीटर लंबी सड़कों को गड्ढामुक्त किया जाना है। इसमें से 50484 किलोमीटर सड़कें पैच मुक्त, 24559.11 किलोमीटर सामान्य मरम्मत और 10116.75 किलोमीटर लंबी सड़कें विशेष मरम्मत के साथ लेपन की श्रेणी में रखी गई हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें