राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने पिछड़े वर्ग की समुन्नत जातियों कुर्मी, यादव और जाट को ओबीसी की आरक्षण सूची से बाहर करने का प्रत्यावेदन सर्वसम्मति से खारिज कर दिया।
आयोग ने कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए इस पर चर्चा नहीं की जा सकती।
आयोग के अध्यक्ष राम आसरे विश्वकर्मा की अध्यक्षता में सोमवार को हुई आयोग की बैठक में पिछड़ी जातियों की जातिवार जनगणना कराने के लिए जनगणना के प्रारूप में पिछड़ी जातियों का कॉलम बनाने का फैसला किया गया।
इससे पंचायती चुनावों में पिछड़े वर्ग को आरक्षण के अनुरूप लाभ दिया जा सकेगा।
विश्वकर्मा ने बताया कि आयोग ने लोहिया ग्रामों के चयन में पिछड़े ग्रामों को प्राथमिकता देने का निर्णय किया है।
शादी अनुदान का भी मिलेगा लाभ
प्रदेश के अन्य पिछड़े वर्गों को अनुसूचित जाति, जनजाति के समान ही कैरी फॉरवर्ड का नियम लागू करने और सौ रुपये के स्टांप पेपर की व्यवस्था को समाप्त करते हुए शादी अनुदान का लाभ दिलाने का फैसला हुआ।
उन्होंने बताया कि कसौंधन जाति के जाति प्रमाणपत्र बनाने के संबंध में मिले प्रत्यावेदन को संबंधित जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति को भेजने का फैसला हुआ।
बैठक में आयोग के उपाध्यक्ष दीप सिंह पाल और रामाधार सिंह के अलावा सदस्य बृजराज सैनी, रामप्रसाद सविता, विद्या यादव, जवाहर लाल साहू, अभय सिंह नायक, अनिल यादव, रिछपाल सिंह, कंचन कनौजिया, निर्मला यादव, आयोग के सचिव अनिल कुमार और अन्य सदस्य मौजूद थे।