लखनऊ। चेतना साहित्य परिषद की ओर से चारबाग स्थित बाल संग्रहालय में रविवार को काव्य संध्या का आयोजन किया गया। शिव भजन कमलेश की अध्यक्षता और रमाशंकर सिंह के संचालन में आयोजित काव्य संध्या का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ।
इसके बाद प्रतिभा श्रीवास्तव ने मातृ स्तवन प्रस्तुत किया। अध्यक्षता करते हुए गीतकार शिवभजन कमलेश ने अपने गीत से सभी का दिल जीत लिया- ओ जीवन को देने वाले, बचपन से क्यों दूर ढकेला...। राम औतार पंकज ने दोहों से ऊर्जा का संचार किया। दिनेश चंद्र अवस्थी ने वीर रस के छंद पढ़े। उन्होंने सुनाया- कोई सुख पाता देख देश धर्म रक्षा हेतु, कितने लगें हैं घाव रण बीच सीने में। हरी लाल मिलन ने भावपूर्ण गीत सुनाया- बाबू जी बैसाखी लेकर रुकते-रुकते चलते, उनकी आंखों के चिराग भी तेरी खातिर जलते। रवीश पांडेय, खुशी राम बाजपेयी, रश्मि शरद और प्रमोद श्रीवास्तव सहित अन्य कवियों ने भी अपनी रचनाओं से सबका मन मोहा।