बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने अब सिर्फ पंजीकरण के आधार पर पोषाहार वितरण पर रोक लगा दिया है। नई व्यवस्था के तहत पोषाहार पाने वाले लाभार्थियों के पंजीकरण में आधार व अन्य पहचान पत्र अनिवार्य कर दिया गया है। यानी पोषाहार लेने के लिए आधार व अन्य पहचान पत्र अवश्य दिखाना होगा। विभाग के अपर मुख्य सचिव एस राधा चौहान ने अधिसूचना जारी कर इस व्यवस्था को लागू कर दिया है। इससे अब लाभार्थियों की संख्या में फर्जीवाड़ा पर अंकुश लगेगा।
अधिसूचना के मुताबिक आधार न होने की स्थिति में आधार के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसी तरह 7 महीने से पांच साल तक की उम्र के बच्चे के नामांकन में भी अब पहचान पत्र देना जरूरी होगा। हालांकि इस उम्र के बच्चों का आधार बनने में अड़चन को देखते हुए उनके किसी अन्य पहचान पत्र को मान्यता दी जाएगी। वहीं लाभार्थियों के लिए आधार का सत्यापन भी अनिवार्य होगा।
लाभार्थी बच्चों के लिए मान्य होंगे ये पहचान पत्र
-आधार के लिए किए गए नामांकन की पर्ची
-जन्म प्रमाण पत्र
-स्कूल के प्रधानाचार्य द्वारा जारी पहचान पत्र
-बच्चे के विधिक संरक्षक का राशन कार्ड
-सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं केलिए बने कार्ड
-अभिभावक का पेंशन कार्ड
-आर्मी कैंटीन का कार्ड
तीन साल से रखा है आधार किट खरीदने का पैसा
लाभार्थियों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर ही आधार बनवाने की सुविधा देने के लिए केंद्र ने प्रदेश के सभी 897 केंद्रों पर आधार किट रखे जाने के निर्देश दिए थे। इसके लिए केंद्र ने वर्ष 2018 में प्रदेश सरकार को 20 करोड़ रुपये उपलब्ध करा दिए थे। इसके बावजूद विभाग ने अब तक आधार किट नहीं खरीदी। नतीजतन प्रदेश में इस समय एक करोड़ से अधिक लाभार्थी बच्चों का आधार नहीं बन पा रहा है। आधार बनवाने में सबसे अधिक परेशानी ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को हो रही है।