सूबे में पिछले सात साल में अवैध धार्मिक स्थलों की संख्या घटने के बजाय बढ़ गई है। वर्ष 2009 में हुए सर्वे में सूबे में 40 हजार अवैध धार्मिक स्थल चिह्नित किए गए थे। आज यदि सर्वे कराया जाए तो इनकी संख्या कहीं अधिक होगी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने प्रदेश सरकार को एक जनवरी 2011 के बाद अतिक्रमण करके बने धार्मिक स्थलों को तोड़ने तथा इससे पहले बने धार्मिक स्थलों को शिफ्ट करने का आदेश दिया है। अवैध धार्मिक स्थलों को हटाने के लिए यह कोई पहला आदेश नहीं है।
वर्ष 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को सरकारी जमीन पर बने अवैध धार्मिक स्थलों को चिह्नित कर उन्हें हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सरकार ने सर्वे कराया। इसमें सूबे में 40 हजार धार्मिक स्थल ऐसे पाए गए जो सड़कों के किनारे, गलियों में, हाईवे या फिर चौराहे पर अवैध तरीके से बनाए गए थे।
डीएम की अध्यक्षता में बनाई गई थी समिति
गृह विभाग के सचिव मणि प्रसाद मिश्रा कहते हैं कि इन अवैध धार्मिक स्थलों को शिफ्ट करने या फिर तोड़ने के लिए जिलों में डीएम की अध्यक्षता में समिति बनाई गई थी।
इस समिति के निर्णय से असंतुष्ट होने पर कमिश्नर की अध्यक्षता में दूसरी अपीलीय समिति बनाई गई थी। इसकी त्रैमासिक रिपोर्ट भी सरकार के पास आती है।
मूक सहमति से नहीं हट रहे अवैध धार्मिक स्थल
सूबे के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह कहते हैं, 2009 में हुए सर्वे में 40 हजार अवैध धार्मिक स्थलों की बात सामने आने पर हड़कंप मच गया।
इसके बाद सरकार ने इस मसले पर चुप्पी साध ली। इसी वजह से ये धार्मिक स्थल नहीं हट पाए। आज यदि सर्वे कराया जाए तो इनकी संख्या कहीं अधिक होगी।
लखनऊ में अवैध मंदिर को पार्क में कर दिया शिफ्ट
लखनऊ में विभूति खंड में सड़क के बीचोंबीच पीपल के पेड़ के नीचे बने अवैध मंदिर के कारण फ्लाई ओवर में बाधा आ रही थी।
मंदिर को हटाने के लिए प्रशासन को बड़ी मशक्कत करनी पड़ी। भारी विरोध के बाद मंदिर को लोहिया अस्पताल के सामने एलडीए के तिकोनिया पार्क में शिफ्ट कर दिया गया।
कब्रिस्तान के कारण बढ़ा दी फ्लाईओवर की लंबाई
गोमतीनगर में पिकप तिराहे से शुरू होने वाले फ्लाई ओवर को पहले उजरियांव में उतरना था, लेकिन यहां बीच सड़क में कब्रिस्तान आ गया।
कब्रिस्तान न हटे, इसके लिए स्थानीय लोगों ने काफी विरोध किया। इसके बाद फ्लाई ओवर की लंबाई बढ़ाकर इसे लोहिया पार्क चौराहे पर उतारा गया।