लखीमपुर खीरी के रहने वाले मो. इमरान (35) लिवर की गंभीर बीमारी से ग्रसित थे। तीमारदारों ने उन्हें बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया था। गुरुवार सुबह डॉक्टरों ने उन्हें केजीएमयू रेफर कर दिया। मरीज को ले जाने के लिए 108 एंबुलेंस सेवा पर कॉल की। दो घंटे बाद भी एंबुलेंस नहीं आई। वहीं अस्पताल ने भी गंभीर मरीज को शिफ्ट करने के लिए एंबुलेंस नहीं दी। ऐसे में तीमारदार मरीज को टेंपो में लादकर ट्रॉमा पहुंचे।
केस-2
डालीगंज निवासी विनोद (32) की गुरुवार सुबह अचानक हालत बिगड़ गई। तीमारदारों ने सरकारी एंबुलेंस सेवा पर कॉल किया, मगर वहां से एंबुलेंस नहीं मिल सकी। मरीज को टेंपो में लादकर अस्पताल लाया गया। इस दौरान मरीज की सांसें उखड़ रही थीं। उसे ऑक्सीजन स्पोर्ट की जरूरत थी।
ये मामले स्वास्थ्य विभाग की ध्वस्त व्यवस्था को आइना दिखा रहे हैं। एंबुलेंस न मिलने से मरीज परेशान हैं। स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना मरीजाें की शिफटिंग के लिए सरकारी एंबुलेंस रिर्जव कर ली हैं। ऐसे में इमरजेंसी सेवा में लगी एंबुलेंस का भी संकट खड़ा हो गया है।
अन्य बीमारियों से पीड़ित गंभीर मरीजों को घंटों इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में मरीज ऑटो, टेंपो व रिक्शे पर लादकर अस्पताल पहुंचाए जा रहे हैं। इसपर अफसरों का दावा है कि सामान्य मरीजों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।