प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गांवों के डिजिटल होने के सपने को साकार करने का काम जियोलॉजिकल इंफोर्मेशन (जीआईएस) और रिमोट सेंसिंग तकनीक से होगा।
बुंदेलखंड के पिछड़े गांवों के लिए बनाया गया विलेज इन्फॉर्मेशन सिस्टम (वीआईएस), इसे बखूबी पूरा करेगा।
रविवार को बायोटेक पार्क में प्रो. आरएस चतुर्वेदी नेशनल कॉन्फ्रेंस के अंतिम दिन पीपुल्स साइंस इंस्टीट्यूट देहरादून के सीनियर असिस्टेंट (वर्तमान में लखनऊ में वन विभाग के जाइका समर्थित जीआईएस प्रोग्राम में एसोसिएट) अरविंद कुमार ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि वीआईएस असल में गांवों को डिजीटल रूप से सशक्त बनाने की योजना है। इसमें जीआईएस डाटा सेटेलाइट से मिले रिफरेंस मैप पर डाला गया, फील्ड सर्वे से स्थानीय जानकारी जुटाई गई।
इसके बाद वीआईएस बनाया गया। यह सिस्टम बुंदेलखंड के 13 जिलों में लागू किया गया।