ट्रेनों में लगाए गए गार्ड बॉक्स
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गार्ड बॉक्स की वजह से ट्रेनें अब लेटलतीफी की शिकार नहीं होंगी। न ही गार्डों को बॉक्स ढोकर अपनी बोगी तक ले जाने पड़ेंगे। उनकी सुविधा के लिए ट्रेन में ही डॉक बॉक्स बना दिए गए हैं, जिसमें गार्ड का सारा सामान लॉक किया जा रहा है। ड्यूटी पर जाने से पहले उन्हें बॉक्स की चाभी मिल जाती है और ड्यूटी ऑफ होने पर वह चाभी ले ली जाती है।
यह अनूठी पहल पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल की ओर से शुरू की गई है। मंडल की वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक डॉ. वीणा वर्मा ने यह प्रयास शुरू किया है। इसके तहत पूर्वोत्तर रेलवे की 22 ट्रेनों में ये बॉक्स फिट करवा दिए गए हैं। डॉ. वीणा वर्मा ने बताया कि ट्रेनों की रवानगी से पहले गार्ड को अपना बक्सा ले जाना पड़ता था। इस बॉक्स में पटाखा, झंडियां, टॉर्च व अन्य इमरजेंसी से जुड़े सामान होते हैं। चूंकि, बॉक्स का वजन 30-40 किलो तक होता था, इसलिए इसे ढोकर बोगी तक ले जाना और ड्यूटी केबाद उतारकर नीचे लाना मुश्किल होता है। कई बार बॉक्स प्लेटफॉर्म पर ही छूट जाते थे, जिससे लोग चोटिल भी होते थे और ट्रेनें में भी देरी की शिकार होती थीं। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
गार्डों को बॉक्स ढोने की जरूरत नहीं होगी। उनकी बोगी में ही बॉक्स को फिट करवा दिया गया है। इस अलमारी सरीखे डॉक में बॉक्स का सारा सामान रहता है, जिसकी चाभी गार्ड को ड्यूटी पर जाने से पहले दे दी जाती है और सामान चेक करवा दिया जाता है। इसके अतिरिक्त जब ड्यूटी से रिलीव होता है तो वह चाभी ले ली जाती है और दूसरे गार्ड को दे दी जाती है। इससे समय की बचत हो रही है। उन्होंने बताया कि पहले चरण में मैलानी-बहराइच रूट की ट्रेनों में इसे लगवाया गया है, अगले चरण में लखनऊ जंक्शन, गोमतीनगर, बादशाहनगर, ऐशबाग सहित अन्य स्टेशनों से रवाना होने वाली गाड़ियों में भी इन बॉक्सों को फिट किया जाएगा। उन्होंने बताया कि एक बॉक्स पर तीन से चार हजार रुपये ही खर्च हुए हैं। लेकिन इससे गाड़ियों का डिटेंशन कम हुआ है और पोर्टरों पर भी व्यय नहीं करना पड़ेगा।