फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब बड़े निजी अस्पतालों के पंजीकरण-नवीनीकरण में अब पुलिस-प्रशासन व आईएमए की सहमति रहेगी

विज्ञापन
बड़े स्कूलों के पंजीकरण व नवीनीकरण के लिए अब पुलिस, प्रशासन और आईएमए की सहमति जरूरी। (फोटो ः प्रती? - फोटो : ??? ?????
विज्ञापन
बड़े निजी अस्पतालों के पंजीकरण-नवीनीकरण में अब पुलिस-प्रशासन व आईएमए की सहमति रहेगी। अभी तक सीएमओ इनका रजिस्ट्रेशन करते थे।
विज्ञापन

50 से कम बेड वाले अस्पतालों का ही पंजीकरण सीएमओ के अधीन होगा। इससे अधिक बेड वाले अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन-रिन्यूवल डीएम के नेतृत्व में बनी कमेटी के माध्यम से होगा।
राजधानी में 1200 से अधिक प्राइवेट अस्पताल हैं। इनका पंजीकरण सीएमओ कार्यालय में हो रहा था, जिनमें क्लीनिक से लेकर 500 और 1000 बेड वाले प्राइवेट अस्पताल भी थे।
विज्ञापन

हालांकि, क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट रजिस्ट्रेशन एक्ट लागू होने बाद नियम में बदलाव हुआ है। अब 50 से अधिक बेड वाले अस्पताल का पंजीकरण डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी के माध्यम से होगा।
इसके लिए जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकरण बनाया गया है। इसमें डीएम, एडीएम पूर्वी, सदस्य इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष, हजरतगंज अपर पुलिस आयुक्त कमेटी के सदस्य शामिल हैं। छोटे अस्पतालों का पंजीकरण-नवीनीकरण अभी सीएमओ के अधीन ही रहेगा।
जिले में महज 80 बड़े अस्पताल
जिले के 1200 से अधिक निजी अस्पतालों में अधिकतर छोटे अस्पताल हैं। इनमें अधिकतर 10 से 50 बेड की क्षमता वाले हैं। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक 50 बेड से अधिक वाले महज 80 अस्पताल है। इनके पंजीकरण-नवीनीकरण पर डीएम के नेतृत्व में बनी कमेटी काम करेगी।
विज्ञापन

पहले एक साल का अस्थायी लाइसेंस मिलेगा
50 बेड से अधिक क्षमता वाले अस्पतालों को पहले अस्थायी तौर पर एक साल का लाइसेंस मिलेगा। मानक पूरे होने पर पांच साल का लाइसेंस मिलेगा। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि 100 बेड वाले अस्पतालों को अस्थायी लाइसेंस के लिए 200 व स्थायी के लिए 1000 हजार रुपये देना होगा। इसी तरह 200 बेड वाले अस्पताल अस्थायी लाइसेंस के लिए 400 व स्थायी के लिए 2000 हजार देने पड़ेंगे। इसी तरह 300 बेड वाले अस्पतालों को अस्थायी लाइसेंस के लिए 600 व स्थायी के लिए 3000 हजार रुपये फीस जमा करनी होगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें