आर्किटेक्टों के साथ समीक्षा बैठक करते एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार।
लखनऊ। नई भवन निर्माण उपविधि व एलडीए बोर्ड में पास प्रस्ताव के तहत अब 7.5 मीटर चौड़ी सड़क पर भी भवन के नक्शे पास होंगे। इसकी प्रक्रिया को और आसान बनाते हुए एलडीए ने भूखंड के सामने की सड़क किस विभाग की है, इसकी रिपोर्ट आर्किटेक्ट को ही लगाने की छूट दे दी है।
ऐसे में अब इसके लिए दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। शुक्रवार को आर्किटेक्टों के साथ समीक्षा बैठक में एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि अभी तक की व्यवस्था के तहत आवेदक को संबंधित विभाग से यह प्रमाणपत्र लेकर देना होता था कि भूखंड के सामने की सड़क किस विभाग ने बनाई है। इसमें काफी समय लगता था, जिससे मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया में देरी होती थी। इसे ध्यान में रखते हुए व्यवस्था को आसान किया गया है। अब नक्शा दाखिल करने वाले आर्किटेक्ट खुद सत्यापित कर सकेंगे कि सड़क किस सरकारी विभाग की है। एलडीए इसी के आधार पर मानचित्र स्वीकृत कर देगा।
नहीं देना होगा साइट प्लान
आर्किटेक्टों ने बताया कि एलडीए की योजनाओं में भवन का मानचित्र स्वीकृत कराने पर भी आवेदक से ही साइट प्लान मांगा जाता है। ऐसा तब है जब संबंधित रिकॉर्ड प्राधिकरण के पास पहले से मौजूद हैं। इस पर वीसी ने आदेश जारी किया कि अब ऐसा नहीं होगा। यह काम प्राधिकरण में मानचित्र अनुभाग करेगा। यह भी कहा कि पूर्व में बनीं बिल्डिंगों में पार्किंग की जगह कम है तो मैकेनाइज्ड या ऑटोमेटेड पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित कराने पर भी शमन मानचित्र स्वीकृत किया जाएगा।
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तीसरी गलती पर निरस्त होगा आवेदन
वीसी ने बताया कि समीक्षा बैठक में पाया गया कि कुछ आर्किटेक्ट मानचित्र के साथ जरूरी शपथ पत्र नहीं लगा रहे तो कोई एफएआर की गणना में गलती कर रहा है। कुछ आर्किटेक्ट नक्शों में आपत्ति लगने पर सुधार करने के बजाय फिर से वही गलती दोहराते हुए नक्शा जमा कर रहे हैं। इससे प्रक्रिया बेवजह लंबित हो रही है। अब व्यवस्था बनाई जा रही है यदि मानचित्र में तीसरी बार गलती मिलेगी तो आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा।