लखनऊ। रहमानखेड़ा के इलाके में 64 दिनों से बाघ लुकाछुपी खेल रहा है। वन विभाग को छका रहे और इलाके में बेखौफ चहलकदमी कर रहा बाघ अब तक 19 शिकार कर चुका है। वह अभी भी पकड़ से बाहर है। बाघ के रेस्क्यू के लिए वन विभाग के तमाम कवायदों के नाकाम हो जाने के बाद उत्तराखंड के एक और टाइगर एक्सपर्ट वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) से शिखा बिष्ट को बुलाया गया है। बाघ के रेस्क्यू के लिए अब उनके रणनीतियों पर सबकी निगाहें हैं।
बृहस्पतिवार को शिखा बिष्ट ने वन विभाग की ओर से किए गए अब तक के प्रयासों को बारीकी से समझा। अब तक लगाए गए सात पिंजरे, दो जगहों पर लगाए गए जाल, 32 ट्रैप कैमरे, पांच सीसीटीवी इस सबको देखा और परखा। इलाके का दौरा भी किया। बृहस्पतिवार को वह रेकी के लिए बंशीगढ़ी के जंगलों की ओर पोखौरा गांव गई थीं।
बंशीगढ़ी के जंगलों की ओर गया बाघ
बुधवार को बाघ के बागवानी संस्थान में होने की बात कही जा रही थी। कुछ ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि अब बाघ संस्थान से लगभग 10 किमी दूर बंशीगढ़ी के जंगलों की ओर चला गया है। लगातार ठिकाना बदलने की वजह से उसके रेस्क्यू में मुश्किलें आ रही हैं। बृहस्पतिवार को ट्रैप में लेने के लिए ठेकेदारों से दो नए पड़वे मंगाए गए हैं। 19 वें शिकार वाली जगह पर ही नया प़ड़वा बांध दिया गया है।
बाघ को आलसी बनाकर पकड़ने की रणनीति
बन विभाग बाघ को आलसी बनाकर पकड़ने की रणनीति बना रहा है। बाघ को रहमानखेड़ा के अंदर ही शिकार उपलब्ध कराया जा रहा है। रणनीति ये बनाई गई है कि आसानी से बिना मशक्कत शिकार उपलब्ध करा कर उसे आदी और आलसी बना दिया जाए। इससे उसे घेरने में आसानी होगी। चहलकदमी का दायरा भी घटेगा और उसे ट्रेस और ट्रैंकुलाइज करना आसान होगा। उधर, शिखा बिष्ट ने बृहस्पतिवार को डीएफओ सितांशु पांडे, नोडल अधिकारी चंदन कुमार, रेंजर सोनम दीक्षित व टीम की ओर से चलाए जा रहे बाघ रेस्क्यू ऑपरेशन की विस्तार से जानकारी ली।
अनुभवहीनता व शुरुआती गलतियां पड़ रही हैं भारी
वनकर्मियों में चर्चा है कि बाघ रेस्क्यू ऑपरेशन में अधिकतर अनुभवहीन अधिकारी लगाए गए हैं। इन्हें बाघ पकड़ने का कभी कोई अनुभव नही रहा है। शुरुआत में बाघ को पकड़ने के प्रयासों के दौरान कई गलतियां हुईं, जिसकी वजह से बाघ चौकन्ना रहने लगा। डॉक्टरों और वन विभाग की टीम में तालमेल न होने से भी बाघ पकड़ने के कई गवां दिए गए।