लखनऊ। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने अपने पाठ्यक्रम में बदलाव किया है। अब शास्त्री व आचार्य की पढ़ाई एक साथ होगी। अध्ययन के दौरान यदि कोई विद्यार्थी बीच में ही कोर्स छोड़ता है तो उसे उसी अवधि तक का प्रमाणपत्र दिया जाएगा। विश्वविद्यालय ने इसकी अधिसूचना जारी की है।
केंद्रीय विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. सर्व नारायण झा ने बताया कि सत्र 2025-26 से शास्त्री व आचार्य पाठ्यक्रमों के प्रवेश पैटर्न में बदलाव किया गया है। अधिसूचना के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर में संचालित शास्त्री व आचार्य पाठ्यक्रम चार और एक साल के पैटर्न पर चलाए जाएंगे। यानी चार वर्षीय शास्त्री के साथ एक वर्षीय आचार्य की पढ़ाई होगी। मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों में भी यही व्यवस्था लागू होगी।
झा ने बताया कि कोई विद्यार्थी शास्त्री प्रतिष्ठा में प्रवेश लेता है और एक वर्ष पढ़ाई कर पाठ्यक्रम छोड़ देता है तो उसे प्रथम वर्ष की परीक्षा के आधार पर प्रमाणपत्र दिया जाएगा। दो वर्ष पर डिप्लोमा और तीन वर्ष लगातार अध्ययन कर परीक्षा पास करने पर डिग्री दी जाएगी। विश्वविद्यालय व संबद्ध महाविद्यालयों में नए सत्र से प्रवेश इसी आधार पर होंगे।