लखनऊ। सीएमओ दफ्तर में प्रशासनिक पद पर कार्यरत एनेस्थिसियोलॉजिस्ट (बेहोशी के डॉक्टर) ने पिछले छह माह में एक भी रोगी नहीं देखा है। वहीं, सीएचसी में एनेस्थिसियोलॉजिस्ट के न होने से सर्जरी नहीं हो पा रही हैं। इससे मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है। शासन ने सीएमओ दफ्तर में कार्यरत अफसरों (डॉक्टरों) को हफ्ते में दो दिन ओपीडी करने का आदेश जारी किया है। लापरवाही बरतने पर कार्रवाई होगी।
राजधानी के सरकारी अस्पताल, सीएचसी व सीएमओ दफ्तर मिलाकर करीब 50 से अधिक डॉक्टर, मरीजों को अपनी सेवाएं नहीं दे रहे हैं। ये सिर्फ बाबूगिरी कर रहे हैं। सीएमओ दफ्तर में पांच डिप्टी, छह एडिशनल सीएमओ तैनात हैं।
इसमें नेत्र रोग विशेषज्ञ, सोनोलॉजिस्ट, सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, आर्थोपैडिक सर्जन व बेहोशी के डॉक्टर हैं। कई डॉक्टर बीते वर्ष तबादला होकर आए थे। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया सभी डॉक्टरों को सीएचसी में सेवाएं देने के लिए आदेश जारी किया गया है। डॉक्टर को मासिक रिपोर्ट देनी होगी।
स्वास्थ्य भवन में डॉक्टर की फौज
स्वास्थ्य भवन में डॉक्टरों की पूरी फौज है। यहां निदेशक, संयुक्त निदेशक, अपर निदेशक व डीजी मिलाकर करीब 50 डॉक्टर हैं। इसमें आर्थोपैडिक, सर्जन, मेडिसिन समेत अन्य विधा के डॉक्टर हैं। यह अफसर भी मरीजों को सेवाएं नहीं दे रहे हैं। तत्कालीन डीजी हेल्थ डॉ. डीएस नेगी ने कई अफसरों को सीएचसी-अस्पतालों से संबद्ध किया था। यह सभी हफ्ते में दो दिन अस्पताल जाकर मरीजों का इलाज करते थे।