लखनऊ-रायबरेली समेत प्रदेश के सर्वाधिक 15 शहरों की हवा को स्वच्छ करने का काम अब राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) की निगरानी में होगा। इसके तहत नियमित अंतराल पर एयर क्वालिटी की रिपोर्ट एनजीटी में दाखिल करनी होगी।
इस संबंध में एनजीटी ने मुख्य सचिव को निर्देश जारी किए हैं। मुख्य सचिव ने संबंधित डीएम से कहा है कि वे इस बाबत तैयार कार्ययोजना का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने यूपी के 15 शहरों में वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंचने से उन्हें ‘नॉन एटेनमेंट सिटीज’ की श्रेणी में रखा है। ये वे शहर हैं, जो पांच वर्षों से अधिक समय से नेशनल एंबिएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड (एनएएक्यूएस) को हालिस करने में नाकाम रहे हैं।
इन शहरों में लखनऊ, कानपुर, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, गाजियाबाद, नोएडा, खुर्जा, फिरोजाबाद, अनपरा, गजरौला, झांसी, मुरादाबाद, रायबरेली और बरेली शामिल हैं। एनजीटी ने इन शहरों की हवा को स्वच्छ करने के लिए तत्काल जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव ने संबंधित डीएम को भेजे पत्र में निर्देश दिए हैं कि शहरों की हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए तैयार कार्ययोजना को अमल में लाएं। एनजीटी के आदेश के तहत वायु (प्रदूषण नियंत्रण एवं निवारण) अधिनियम-1981 की धारा-31 ए के तहत राज्य सरकार को इस कार्ययोजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इस पर अमल न होने पर जिम्मेदार लोगों, संस्थाओं व अफसरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
हवा की गुणवत्ता पर नजर रखने को बनी कमेटी
हवा की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए पर्यावरण विभाग ने 6 सदस्यीय एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग कमेटी बनाई है। साथ ही सीपीसीबी की गाइडलाइंस के अनुसार कार्ययोजना तैयार की गई है। इस कार्ययोजना के अनुसार वाहनों से होने वाले प्रदूषण और सड़कों पर उड़ने वाली धूल पर नियंत्रण के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे।
उद्योगों से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए भी जरूरी यंत्र तत्काल लगाने होंगे। बॉयोमास उत्सर्जन पर नियंत्रण, फसल अवशेषों और कूड़ा व सॉलिड वेस्ट को जलाने से रोकने के लिए भी प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। भवनों के निर्माण और ध्वस्तीकरण में भी वे सभी उपाय करने होंगे, जिनसे हवा प्रदूषित न हो। इसके अलावा भी वायु प्रदूषण रोकने के लिए सीपीसीबी ने जरूरी उपायों की लंबी फेहरिस्त दी है।