मेट्रो रेल परियोजना के लिए 1009 करोड़ रुपये वित्तीय वर्ष-2015-16 में देने पर राज्य सरकार ने अपनी सहमति दे दी थी। इसको राज्य सरकार के बजट में घोषित करने की उम्मीद भी की जा रही थी, मगर बजट में सरकार ने अभी केवल 425 करोड़ रुपये का ही प्रावधान किया गया है।
यह प्रस्तावित रकम के आधे से भी कम है। ऐसे में केंद्रीय अनुमोदन की राह देख रहे लखनऊ मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (एलएमआरसी) के सामने राज्य सरकार ने भी संकट खड़ा कर दिया है।
माना जा रहा था कि एलएमआरसी की ओर से प्रस्तावित 1009 करोड़ रुपये का बजट 2015-16 के लिए पर्याप्त होगा, लेकिन अगले वित्तीय वर्ष में उसे बजट के संकट का सामना करना पड़ेगा।
क्या संकट में पड़ जाएगी मेट्रो
राज्य सरकार अब अगले साल अपने पास से इस प्रोजेक्ट कोई धन नहीं लगा सकेगी। ऐसे में पीआईबी की स्वीकृति न मिलने की दशा में प्रोजेक्ट फंस जाएगा। वहीं विदेशी ऋण को फाइनल करने के लिए 31 मार्च तक पीआईबी की स्वीकृति हासिल करना होगा।
इसे लेकर एलएमआरसी के अधिकारियों को अब चिंता सताने लगी है। प्रदेश सरकार के स्तर पर भी केंद्र सरकार से बातचीत जारी है, मगर केंद्र की चुप्पी अब परियोजना के भविष्य पर सवालिया निशान खड़ा कर रही है।
वहीं, हामी के बाद भी कम बजट का अनुमोदन का अब प्रदेश सरकार ने भी संकट खड़ा कर दिया है। जबकि इस वर्ष एलएमआरसी को सिविल, डिपो, स्पेशल स्पैन, रोलिंग स्टॉक एंड सिग्नलिंग, भूमिगत मेट्रो के लिए डिटेल डिजाइन कंसलटेंट और संभवत: भूमिगत सेक्शन के लिए भी टेंडर करना है।
ऐसे में इस 425 करोड़ के बाद एलएमआरसी के लिए अनुपूरक बजट दूसरा सहारा होगा।