राजधानी के जूनियर इंजीनियर (जेई) अब झटपट पोर्टल पर बिजली कनेक्शन के नए आवेदन मामूली कमी और खुन्नस में निरस्त नहीं कर पाएंगे।
सिर्फ बकाया बिल से संबंधित आवेदन ही निरस्त कर पाएंगे। इसके लिए भी अधीक्षण अभियंता से ऑनलाइन अनुमोदन लेना पड़ेगा।
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक सूर्यपाल गंगवार के निर्देश पर शनिवार से ये नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। इससे आवेदकों को बार-बार आवेदन करने की परेशानी से मुक्ति मिल जाएगी।
नई व्यवस्था के तहत आवेदन में कमी पाए जाने पर आपत्ति दर्ज करा उसे पूरा कराया जाएगा। साथ ही तय दूरी से अधिक कनेक्शन स्थल, बिजली सप्लाई का सिस्टम न होने पर आवेदक को एस्टीमेट बनाकर देना पड़ेगा।
मगर, जांच के दौरान यह पता चले कि आवेदक उस परिसर पर बिजली कनेक्शन लेना चाहता है, जिस पर पहले से बिल बकाया है तो अधीक्षण अभियंता से अनुमोदन लेकर आवेदन निरस्त कर देंगे।
इस संबंध में मुख्य अभियंता (सिस गोमती) मधुकर वर्मा ने बताया कि प्रबंध निदेशक के निर्देश का अमल शुरू हो चुका है।
आवेदक को 300 रुपये तक की चपत
झटपट पोर्टल व निवेश मित्र पर आवेदन निरस्त करने पर 300 रुपये तक की चपत लगती थी। प्रोसेसिंग फीस और साइबर कैफे को चुकाया गया पैसा बेकार हो जाता। दोबारा आवेदन करने पर आवेदक को फिर से जेब ढीली करनी पड़ती।
हर माह 5500 आवेदन
राजधानी में घरेलू, वाणिज्यिक समेत सभी तरीके के लगभग 5500 नए कनेक्शन के आवेदन होते हैं। लेसा के ट्रांस गोमती व सिस गोमती जोन में 26 वितरण खंड है, जिसमें औसतन 200-200 बिजली कनेक्शन के आवेदन हर माह होते हैं। शहरी क्षेत्र के मुुकाबले ग्रामीण क्षेत्र में 25 फीसदी आवेदक अधिक होते हैं।