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110 पार्षदों को 14वें वित्त आयोग से मिलने वाले बजट में मिलेगा 50 लाख का कोटा

Sun, 09 Jun 2019 01:23 AM IST
सौरभ दिक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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लखनऊ - फोटो : self
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बजट में संशोधन की समयसीमा समाप्त होने के बाद अब पहली बार नगर निगम के 110 पार्षदों को 14वें वित्त आयोग से मिलने वाले बजट से 50 लाख रुपये के विकास कार्य कराने का मौका मिलेगा। कार्यकारिणी से पास 95 लाख रुपये पार्षद कोटा में शेष 45 लाख के काम निगम निधि से कराए जाएंगे।
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इससे नगर निगम पर बोझ कम होगा और बजट की कमी से काम भी नहीं अटकेगा। बजट में बदलाव की इस नई व्यवस्था से निगम पर सालाना 55 करोड़ रुपये का भार भी कम होगा। डेढ़ साल से पार्षद विकास कार्य न होने का रोना रो रहे हैं।

कार्यकारिणी और सदन की बैठक में यह कहते रहे कि बकाया भुगतान न होने से ठेेकेदार काम नहीं कर रहे। इसे लेकर पिछली सदन में भाजपा के कार्यकारिणी सदस्य नागेंद्र सिंह चौहान की ओर से प्रस्ताव लाया गया था कि  निगम पर तीन अरब की देनदारी है।
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पार्षद कोटे के काम निगम निधि से कराए जाते हैं और नगर निगम के पास पैसा नहीं है। ठेकेदारों को भुगतान नहीं हो रहा है तो वे पार्षद कोटे के काम करने को तैयार नहीं होते। हालांकि अवस्थापना, 14वां वित्त व शासन की अन्य निधियों के काम को तैयार रहते हैं, क्योंकि उसका भुगतान मिल जाता है।

ऐसे में 14वें वित्त आयोग से आने वाले बजट से ही पार्षद कोटे से होने वाले 50 लाख के कामों का भुगतान कराया जाए। इसे देखते हुए प्रशासन ने नए वित्तीय वर्ष 2019-20 के बजट में पार्षद कोटा तो 95 लाख का रखा। इसमें 50 लाख के काम 14वें वित्त आयोग के मद और 45 लाख के काम नगर निगम निधि से करने का प्रावधान किया।

कोटे में बदलाव का हुआ था विरोध
25 फरवरी को कार्यकारिणी में जब बजट पेश हुआ था तो कई सदस्यों ने पार्षद कोटे में बदलाव पर हंगामा भी किया था। उनका कहना था कि 95 लाख का जो पार्षद कोटा है उसमें 14वें वित्त आयोग से होने वाले काम न जोड़े जाएं। 14वें वित्त के काम तो वैसे ही कराए जाते हैं। इन्हें जोड़ने से पार्षदों का कोटा कम हो जा रहा है। इस पर तय हुआ था कि 14वें वित्त के काम पार्षद कोटे में नहीं जोड़े जाएंगे। हालांकि, संशोधन की कार्यवाही जारी न होने से वह संशोधन लागू नहीं हो पाएगा। नगर निगम अधिनियम की धारा 146 में किए प्रावधान से जो बजट कार्यकारिणी में पेश किया गया था वही माना जाएगा।

आय अधिक दिखाकर कर देते थे अधिक खर्च
महापौर संयुक्ता भाटिया का कहना है कि नगर निगम की आमदनी उतनी नहीं है जितना उसका खर्च है। इस कारण ही इतनी देनदारी है। बजट बनाने वाले आय का अधिक प्रावधान कर खर्च कर देते थे, पर आय उतनी होती नहीं थी। इससे निगम पर कर्ज बढ़ता रहा है। इसे कम करने को बजट में बदलाव किया गया। इसे लेकर कुछ पार्षदों ने विरोध तो कुछ ने समर्थन भी किया।

बदलाव से ये होंगे फायदे
देनदारी के कारण पार्षदों के क्षेत्र में विकास कार्य नहीं रुकेंगे। नगर निगम पर देनदारी का भार कम होगा। भ्रष्टाचार भी खत्म होगा। भुगतान को लेकर लोग जुगाड़ लगाते हैं। ठेकेदार भी भुगतान न होने का बहाना बनाकर काम से मना नहीं कर पाएंगे। अब सभी वार्डों में समान मिलेगा 14वें वित्त आयोग का बजट।
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