लखनऊ। अब महीन चीरे से भी कूल्हा प्रत्यारोपण हो सकेगा। इससे मरीज को अस्पताल से जल्द छुट्टी मिल जाएगी। प्रत्यारोपण के बाद वह चलने-फिरने के साथ पहले की तरह रोजमर्रा के काम भी कर सकेगा।
बृहस्पतिवार से शुरू भारतीय आर्थ्रोप्लास्टी एसोसिएशन के तीन दिवसीय 21वें राष्ट्रीय सम्मेलन में केजीएमयू के एनॉटमी विभाग में कैडवर पर डॉक्टरों को नई विधि से कूल्हा प्रत्यारोपण का प्रशिक्षण दिया गया।
नोएडा के जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. डीपी शर्मा ने बताया कि अभी कूल्हा प्रत्यारोपण के लिए कमर के किनारे के हिस्से में आठ से 10 इंच का चीरा लगाया जाता है। नई तकनीक बिकनी डायरेक्ट एनथीरियो एप्रोच में पेट के निचले हिस्से में दो से तीन इंच का ही चीरा लगाना पड़ता है।
भारतीय आर्थ्रोप्लास्टी एसोसिएशन के आयोजक अध्यक्ष डॉ. संदीप कपूर ने बताया कि नई विधि से कूल्हा प्रत्यारोपण में दाग भी नजर नहीं आता। मरीज जमीन पर बैठ सकता है। नई विधि से प्रत्यारोपण में इम्प्लांट के हिलने की आशंका बेहद कम है। पैर की लंबाई बराबर रहती है। ऑपरेशन के दौरान खून कम बहता है और दर्द कम होता है। डॉ. संदीप ने बताया कि नई विधि में टांके काटने की भी जरूरत नहीं है।