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Lucknow News: दहेज मुकदमों में अब साक्ष्य संकलन करेगा न्याय सुनिशि्चत

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दहेज मुकदमों में अब साक्ष्य संकलन करेगा न्याय सुनिशि्चत
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लखनऊ। दहेज से जुड़े आपराधिक मामलों की विवेचना अब अधिक प्रभावी और साक्ष्य आधारित होगी। अभियोजन विभाग ने विवेचना की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक विस्तृत चेकलिस्ट जारी की है। यह आदेश इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एक पीठ द्वारा एक मुकदमे की सुनवाई के दौरान दिए गए थे।
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चेकलिस्ट के अनुसार, दहेज लेने या देने के आरोप की पुष्टि केवल आरोप के आधार पर नहीं की जा सकेगी। जांच अधिकारी को मौखिक, दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक सभी प्रकार के साक्ष्य संकलित करने होंगे। मौखिक साक्ष्य के तहत पीड़ित के परिवारजनों और रिश्तेदारों के बयान दर्ज किए जाएंगे, जबकि दस्तावेजी साक्ष्यों में रसीदें, लेन-देन से जुड़े अभिलेख शामिल होंगे।

इसके अतिरिक्त, वीडियोग्राफी और फोटोग्राफ को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के रूप में शामिल किया जाएगा। चेकलिस्ट में यह भी निर्देशित किया गया है कि अभियुक्त की आयु जैसे तथ्यों का सत्यापन भी विश्वसनीय प्रमाणों के आधार पर किया जाए। नए कानूनी प्रावधानों के तहत, यदि कोई रिपोर्ट दर्ज कराई जाती है, तो उसे प्रथम दृष्टया अपराध माना जाएगा।
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इस प्रक्रिया में विवेचक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। उसे यह तय करना होगा कि मामला सही है या किसी निर्दोष को फंसाने की कोशिश की गई है। सही साक्ष्य और निष्पक्ष जांच से ही न्याय सुनिश्चित किया जा सकेगा।

अभियोजन विभाग के संयुक्त निदेशक अवधेश कुमार सिंह के अनुसार, केवल मौखिक साक्ष्यों के आधार पर मुकदमों में अभियुक्त के बचने की संभावना ज्यादा रहती है। मामले में यदि मौखिक के साथ इलेक्ट्रानिक, फाॅरेंसिक और अभिलेखीय साक्ष्य उपलब्ध हैं तो अभियुक्त को अग्रिम जमानत मिलने की संभावना कम हो जाती है। कई मामलों में मौखिक साक्ष्य देने वाले लोग ही पलट जाते हैं जिससे पूरे मामले का रुख बदल जाता है। न्याय सुनिश्चित करने के लिए मौखिक साक्ष्यों के साथ फाॅरेंसिक, इलेक्ट्रानिक और अभिलेखीय साक्ष्यों का संकलन आवश्यक है।
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