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अब जालसाजों के निशाने पर आए भीम, पेटीएम व गूगल पे एप, लाखों रुपये हुए साफ

Thu, 20 Jun 2019 12:58 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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सांकेतिक तस्वीर
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क्रेडिट व डेबिट कार्ड का नंबर और कार्ड वेरिफेकेशन वैल्यू (सीवीवी) व वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) पूछ कर ठगी करने वाले जालसाजों के निशाने पर भीम, गूगल पे और पेटीएम एप भी आ गया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों की साइबर सेल में पिछले पांच महीनों में इस तरह के 12 से ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं। शिकार बने ऐसे लोगों का ठग लाखों रुपये साफ कर चुके हैं। 
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तफ्तीश में जुटे एसटीएफ साइबर क्राइम के एसपी सुशील घुले बताते हैं कि झारखंड का जामताड़ा जिला साइबर ठगों का अड्डा है। वहीं नाइजीरिया का गिरोह भी सक्रिय है। ये ठग गूगल पे, भीम एप व पेटीएम इस्तेमाल करने वाले लोगों के मोबाइल पर फोन कर टुअर पैकेज से लेकर, महंगे इनाम या उसके बदले कैश का लालच देते हैं। इसके बाद एक अन्य एप डाउनलोड कराकर पैसे अपने बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करा लेते हैं। 

अपनी यूपीआई आईडी को कूपन बताकर सेव करा देते हैं

गुगल पे, भीम और पेटीएम जैसे सबसे सुरक्षित होने का दावा किए जाने वाले एप में सेंध लगाने वाले साइबर ठग शिकार से एक एप डाउनलोड कराते हैं। साइबर क्राइम के एसपी सुशील घुले बताते हैं कि अकाउंट को लिंक कराने से लेकर स्टेप बाई स्टेप पेमेंट के प्रॉसेस तक को भी गिरोह पूरा कराता है। बड़ी चालाकी से अपनी यूपीआई आईडी को पैकेज का कूपन बताकर सेव करा देता है। इसके बाद पैसा ट्रांसफर करने को कहता है। जैसे ही पैसा ट्रांसफर हुआ वह ठग के खाते में चला जाता है। 

20-30 हजार रुपये का एक बार में लगा देते हैं चूना
एप पर रकम ट्रांसफर की 20 से 30 हजार रुपये तक की अलग-अलग लिमिट होती है। ऐसे में ठग एक बार में लिमिट तक का पैसा ट्रांसफर करा लेता है। पिछले दिनों इस तरह की ठगी का शिकार हुए अदनान ने जब साइबर सेल में शिकायत की और पुलिस ने छानबीन की तो पता चला कि यह पैसे झारखंड के एक खाते में स्थानांतरित किए गए। पुलिस ने खाते की डिटेल पता की तो पता फर्जी निकला और जिस अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कराए गए थे वह अकाउंट भी खाली हो चुके थे। 
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ग्रामीण ज्यादा हो रहे साइबर ठगी का शिकार 

सुशील घुले ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करने वाले ग्राहक इस ठगी का शिकार अधिक हो रहे हैं। इस तरह के मामले में बैंक भी ग्राहक की गलती की वजह से उसकी मदद करने से मना कर देता है।

नाइजीरिया का गिरोह फेसबुक से लेकर शिकार की हर गतिविधि पर रखता है नजर
सुशील बताते हैं कि इस तरह के साइबर अपराध में नाइजीरियाई गैंग भी सक्रिय है। यह गैंग फेसबुक प्रोफाइल और ग्राहक की एक्टिविटी देख कर उसकी रुचि की चीजों से पहले अपना संपर्क मजबूत करते हैं और फिर तरह-तरह के ऑफर, कस्टम में माल फंसा होने का ऑफर देकर ठगी का शिकार बनाते हैं।

बीते दिनों ऐसे ही एक नाइजीरियाई गैंग को यूपी एसटीएफ के साइबर क्राइम के पुलिस कर्मियों ने गिरफ्तार किया जिसने राजधानी के केजीएमयू की एक महिला प्रोफेसर को अपना शिकार बना कर एक करोड़ रुपये से अधिक ठग लिए थे। 
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