भले ही राजा महेंद्र प्रताप की जयंती मनाने को लेकर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) और भाजपा के बीच टकराव टल गया हो लेकिन अब राजा की जयंती पर एएमयू में प्रस्तावित सेमिनार को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
छात्र यूनियन का कहना है कि वीसी ने भाजपा नेताओं के दबाव में आकर सेमिनार आयोजित करने का फैसला लिया है जोकि पूरी तरह से अनुचित है। छात्र यूनियन का कहना है कि एएमयू का ओहदा बहुत बड़ा है।
इसके विषय में स्थानीय भाजपा नेताओं से कोई भी समझौता करना बेमानी होगी। शनिवार को एएमयू छात्र यूनियन हाल में पहली जनरल बाडी मीटिंग (जीबीएम) हुई।
मीटिंग में सभी पदाधिकारियों सहित कार्यकारिणी भी मौजूद थी। अध्यक्ष अब्दुल्ला अजाम, उपाध्यक्ष सैय्यद मसुदुल हसन और सचिव शाहजेब अहमद राजा महेंद्र प्रताप सिंह की जयंती मनाने के मामले पर संजीदा तो दिखे लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि एएमयू की स्थापना में बहुत सारे लोगों का योगदान है।
अकेले वीसी नहीं ले सकते फैसला
अब यह मुनासिब नहीं है कि हम सभी लोगों की जयंती मना सकें। वीसी जमीरउद्दीन शाह द्वारा सेमिनार कराए जाने की बात पर उन्होंने कहा कि यह फैसला अकेले वीसी नहीं ले सकते।
इसके लिए इस मामले को एग्जीक्यूटिव, एकेडमिक काउंसिल और कोर्ट में रखना होगा। उन्होंने अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि एएमयू के ओहदे को भूलते हुए वीसी ने स्थानीय भाजपा नेताओं के दबाव में यह फैसला लिया है, जो गलत है।
उन्होंने बाहरी लोगों पर आरोप लगाते हुए कहा कि 150 साल से उन्हें राजाजी याद नहीं आए। अब उनके नाम पर फूट डालने का काम किया जा रहा है। जीबीएम में फैसला लिया गया कि सेमिनार के बारे में अगली जीबीएम में फिर से चर्चा की जाएगी।
छात्र यूनियन उपाध्यक्ष सैय्यद मसूद उल हसन ने बताया कि कोल विधायक जमीरउल्लाह के साथ उन्होंने उत्तर प्रदेश के सीएम अखिलेश यादव से मुलाकात की।
राजाजी के नाम पर उठे विवाद से अवगत कराया। उपाध्यक्ष की मानें तो सीएम ने आश्वासन दिया है कि एएमयू के साथ किसी को भी राजनीति करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।इसके लिए जिले के एसएसपी और डीएम को निर्देश दे दिए गए हैं।
एएमयू बचाओ मंच करेगा काम
एएमयू बचाओ मंच के अध्यक्ष डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा है कि उनका मंच एएमयू में आरक्षण लागू कराने, बिना बात की राजनीति बंद कराने, सभी धर्म और जाति के छात्रों को एक समान सम्मान दिलाने का कार्य करने के लिए गठित हुआ था।
यह स्थानीय प्रयास था, जिसने कई मुद्दों पर अपनी आवाज व्यापक स्तर पर बुलंद की है। राजा महेंद्र प्रताप के प्रकरण में बचाओ मंच ने वार्ता में भाग लिया था।
इससे ज्यादा की भूमिका नहीं है। क्योंकि बचाओ मंच भाजपा या आरएसएस का कोई संगठन नहीं है इसलिए इसके गठन या भंग करने का अधिकार किसी को नहीं है। यह संगठन आरएसएस और भाजपा नेताओं के सुझाव के साथ कार्य करता रहेगा।
परदादा राजा महेंद्र प्रताप सिंह के जन्म दिन को लेकर छिड़े संग्राम से उनके ही वंशज दूर रहना चाहते हैं। वह नहीं चाहते जिस राजा ने अमन चैन कायम करने के लिए पूरी जिंदगी लगा दी उनके ही वारिसों पर अशांति फैलाने का बदनुमा दाग लगे।