लखनऊ। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव करते हुए बीए, एमए और पीएचडी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए औपचारिक शैक्षिक योग्यता को अनिवार्य न मानने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अब यदि किसी व्यक्ति के पास संबंधित विषय का व्यावहारिक या पारंपरिक ज्ञान है, तो वह प्रवेश के योग्य होगा, बशर्ते वह विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित विषय आधारित परीक्षा में उत्तीर्ण हो।
विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। निदेशक प्रो. सर्व नारायण झा ने बताया कि यह देश का पहला विश्वविद्यालय होगा, जहां बिना औपचारिक डिग्री के भी विषय ज्ञान के आधार पर उच्च शिक्षा में प्रवेश संभव होगा। यह व्यवस्था आगामी सत्र से लागू की जाएगी।
प्रवेश से पूर्व विश्वविद्यालय स्तर पर विषय विशेषज्ञता की परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसमें सफल होने पर अभ्यर्थी को प्रमाणपत्र दिया जाएगा, जिसके आधार पर उसे स्नातक, परास्नातक या पीएचडी में प्रवेश मिल सकेगा।
छात्रवृत्ति और रोजगार के अवसर भी होंगे उपलब्ध
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, परंपरागत अध्ययन के आधार पर परास्नातक में प्रवेश लेने वाले छात्रों को 40 हजार रुपये मासिक और पीएचडी छात्रों को 65 हजार रुपये मासिक छात्रवृत्ति दी जाएगी। इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शिक्षा के बीच संवाद स्थापित करना है। साथ ही, ऐसे विद्यार्थियों को सरकारी व निजी संस्थानों में भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। संस्कृत विश्वविद्यालय के परिसरों में शिक्षकों की भर्ती में उन्हें प्राथमिकता मिलेगी और अन्य शिक्षण संस्थानों में विद्वान के रूप में चयन की संभावना भी बढ़ेगी।