फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पंचायत चुनाव: ग्राम पंचायतों में चक्रानुक्रम आरक्षण वाली नियमावली में 11वें संशोधन की अधिसूचना जारी

Thu, 11 Feb 2021 11:15 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
पंचायत चुनाव। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

ग्राम पंचायतों के चक्रानुक्रम आरक्षण का रास्ता साफ करने के लिए पंचायत राज नियमावली में 11वें संशोधन की अधिसूचना जारी कर दी गई। कैबिनेट ने मंगलवार को ही नियमावली में संशोधन को मंजूरी दी थी। ऐसी संभावना है कि त्रिस्तरीय पंचायतों में स्थानों व पदों के आरक्षण की नीति के संबंध में गुरुवार को शासनादेश जारी हो सकता है।

विज्ञापन


वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव में यूपी पंचायतराज (स्थानों व पदों का आरक्षण व आवंटन) नियमावली में 10वां संशोधन किया गया था। अब 11वां संशोधन किया गया है। इसके बाद प्रदेश के उन चार जिले गोंडा, शामली, मुरादाबाद व गौतमबुद्धनगर में ग्राम पंचायतों के निर्वाचन क्षेत्र का आरक्षण नए सिरे से नहीं होगा, जिनमें ग्राम पंचायतों का पूर्म परिसीमन (पुनर्गठन) किया गया है। इनमें आरक्षण की कार्यवाही शेष 71 जिलों की तरह चक्रानुक्रम में ही होगी।

बता दें कि प्रदेश सरकार ने मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में कैबिनेट बाइ सर्कुलेशन प्रस्ताव को मंजूरी देकर त्रिस्तरीय ग्रामीण पंचायतों की नियामावली में संशोधन कर आरक्षण व्यवस्था संबंधी आदेश जारी करने की अड़चन दूर कर दी थी। इससे से ग्राम पंचायतों व ग्राम पंचायत सदस्यों के चक्रानुक्रम आरक्षण की कार्यवाही का रास्ता साफ हो गया है।

विज्ञापन

2015 में किया गया था 10वां संशोधन

प्रदेश में वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव में यूपी पंचायतराज (स्थानों व पदों का आरक्षण व आवंटन) नियमावली 1994 में 10वां संशोधन किया गया था। नियमावली का नियम-4 ग्राम प्रधानों व नियम-5 ग्राम पंचायत सदस्यों से संबंधित है। इसमें एक नया प्रावधान जोड़ा गया था- अगर सामान्य निर्वाचन के पूर्व परीसीमन (सामान्य पुनर्गठन) की कार्यवाही जनसंख्या वृद्धि अथवा अन्य कारणों से की जाती है तो उस चुनाव में पिछले आरक्षणों को शून्य मानते हुए आरक्षण नए सिरे से किया जाएगा। 2011 की जनगणना का हवाला देते हुए इस नियम के आधार पर 2015 के चुनाव में ग्राम पंचायत सदस्य व ग्राम प्रधान के पदों के लिए नए सिरे से आरक्षण की व्यवस्था की गई। मगर, चार जिलों गोंडा, शामली, मुरादाबाद व गौतमबुद्धनगर में सामान्य पुनर्गठन 2015 में पूरा नहीं हो सका।

इसके बावजूद नए सिरे से आरक्षण की कार्यवाही की गई थी। इन चार जिलों में सामान्य पुनर्गठन की कार्यवाही नवंबर-दिसंबर, 2020 में हुई। ऐसे में 2015 में नियमावली में जोड़े गए प्रावधान को यदि समाप्त नहीं किया जाता तो इन चार जिलों में नए सिरे से पंचायतों के आरक्षण की कार्यवाही करनी पड़ती, जो बाकी 71 जिलों की व्यवस्था से भिन्न होगी। एक तरह से सभी जिलों में चक्रानुक्रम आरक्षण समान रूप से आगे नहीं बढ़ पाता।
विज्ञापन

अब चक्रानुक्रम आरक्षण का रास्ता साफ हो गया है

इस विसंगति को दूर करने के लिए सरकार ने यूपी पंचायतराज (स्थानों व पदों का आरक्षण व आवंटन) नियमावली 1994 में 11वां संशोधन कर पुनर्गठन के बाद नए सिरे से आरक्षण का प्रावधान समाप्त कर दिया है। इस तरह पूरे प्रदेश में चक्रानुक्रम आरक्षण का रास्ता साफ हो गया है।

आरक्षण की गाइडलाइन कभी भी हो सकती है जारी
प्रदेश सरकार पंचायतों में आरक्षण के दिशानिर्देश कभी भी जारी कर सकती है। हाईकोर्ट ने सरकार को ग्राम प्रधानों के चुनाव 30 अप्रैल तक कराने के निर्देश दिए हैं। इस निर्देश के बाद शासन स्तर पर कार्यवाही में तेजी आ गई है। सरकार ने 17 मार्च तक आरक्षण की कार्यवाही पूरा करने का एलान किया है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें