सुप्रीम कोर्ट ने 7 मई के आदेश में उप्र. मंत्री (वेतन, भत्ता और प्रकीर्ण) (संशोधन) अधिनियम को निरस्त कर दिया था। यह एक्ट सुप्रीम कोर्ट के 1 अगस्त 2016 के उस आदेश बाद बनाया गया था, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास आवंटन को अवैध ठहराते हुए उनसे दो माह में बंगले खाली कराने को कहा गया था।
इसके बाद तत्कालीन अखिलेश सरकार ने पूर्व सीएम के बंगलों के आवंटन को कानूनी जामा पहनाने के लिए विधानमंडल के दोनों सदनों से अधिनियम पारित कराया। लोक प्रहरी ने इसी अधिनियम को चुनौती दी थी, जिसे शीर्ष कोर्ट ने निरस्त कर दिया था।
1980 से दी जा रही थी ताउम्र आवास की सुविधा
प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्रियों को 1980 से आजीवन आवास सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इन बंगलों का किराया बेहद कम है, लेकिन इनकी मरम्मत पर हर साल लाखों रुपये खर्च होते हैं। सभी पूर्व सीएम के बंगले राजधानी के वीआई इलाकों में हैं।
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान गृहमंत्री राजनाथ सिंह।
एनडी तिवारी--माल एवेन्यू में--आवंटन: वर्ष 1989
कल्याण सिंह--माल एवेन्यू में--वर्ष : 1991
मुलायम सिंह यादव--विक्रमादित्य मार्ग--1992
राजनाथ सिंह--कालिदास मार्ग--2000
मायावती--माल एवेन्यू--1995
अखिलेश यादव--विक्रमादित्य मार्ग--2016
मामले पर राज्य संपत्ति अधिकारी योगेश कुमार शुक्ला का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास खाली कराने के लिए नोटिस भेजा गया है। इसके लिए उन्हें 15 दिन का समय दिया गया है।