अंबेडकरनगर जिले के सीहमई कारीरात निवासी देवमणि ने गांव के ही सुरेंद्र प्रताप सिंह पुत्र मेन बहादुर सिंह के दस्तावेज पर बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक तौर पर नियुक्ति पा ली थी। उसकी तैनाती जमुनहा के उच्च प्राथमिक विद्यालय नव्वा पुरवा में हुई थी। इस बीच फर्जी दस्तावेज की शिकायत पर एसटीएफ ने जांच शुरू की। आरोप सही मिलने पर 14 जुलाई 2020 को देवमणि को नियुक्ति तिथि से बर्खास्त कर भिनगा कोतवाली में केस दर्ज कराया गया।
इसी मामले में 12 दिसंबर को बेसिक शिक्षा विभाग ने देवमणि के स्थान पर रिक्शा चालक मनोहर यादव को फर्जी शिक्षक बताते हुए 51. 63 लाख रुपये की रिकवरी का नोटिस भेज दिया। चेताया कि पैसा नहीं जमा करने पर आरसी जारी कर वसूली कराई जाएगी। इसके बाद पूरे परिवार सहम गया। मनोहर यादव ने रविवार को अमर उजाला कार्यालय पहुंचकर आपबीती बताई और कहा कि इतनी रकम तो घर और पूरी खेती बेचने पर भी नहीं चुका पाऊंगा। मैं निरक्षर हूं। कभी स्कूल गया ही नहीं। आखिर शिक्षक के पद तैनाती कैसे ले लूंगा। बेसिक शिक्षा विभाग की इस लापरवाही को हमने सोमवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिम्मेदारों से सीधे बात भी की।
खबर का संज्ञान लेते हुए बीएसए अजय कुमार ने बताया कि मामले की जांच पुलिस कर रही है। कोतवाली पुलिस की ओर से उपलब्ध कराई सूची के आधार पर गलती से मनोहर के नाम नोटिस जारी हुआ था, जिसे अब सुधार लिया गया है।