लखनऊ। होटल और पर्यटन उद्योग में हर ब्रांड खुद को सबसे अलग बताने की कोशिश करता है। ग्राहकों को विविधता आकर्षित करती है, लेकिन विविधता के साथ ही सभी को समानता का एहसास दिलाने वाले ब्रांड दिल जीतते हैं। भारतीय प्रबंध संस्थान लखनऊ के अध्ययन में यह बात सामने आई है। यह अध्ययन जर्नल ऑफ हॉस्पिटैलिटी मार्केटिंग एंड मैनेजमेंट में प्रकाशित हुआ है।
भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) लखनऊ में मार्केटिंग संकाय की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विशाखा चौहान, आईआईएम संबलपुर के स्ट्रेटजी के असिस्टेंट प्रोफेसर अकीब सोहेल और एलबीएस इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर मानसी गुप्ता ने यह अध्ययन किया है। अध्ययन के मुताबिक, हॉस्पिटैलिटी उद्योग में विविधता, समानता और समावेशन की पहल उपभोक्ता निर्णयों को प्रभावित करती है।
डॉ. विशाखा चौहान के मुताबिक, आतिथ्य और पर्यटन क्षेत्र वैश्विक स्तर पर उपभोक्ताओं के विविध वर्ग के संपर्क में है। इसलिए इस उद्योग के लिए विविधता, समानता और समावेशन प्रथाओं को अपनाना बेहद जरूरी है। अध्ययन में देखा गया कि जिन ब्रांड में विविधता होने के साथ ही अतिथियों को समानता का एहसास होता है, उसे वे काफी पसंद करते हैं।
विज्ञापनों का वास्तविक आंतरिक प्रक्रियाओं से हो मेल
शोध में किए गए प्रयोगों के आधार पर टीम ने पाया कि उपभोक्ताओं की उन आतिथ्य ब्रांडों के बारे में अनुकूल राय है, जो भर्ती, प्रशिक्षण, विपणन और ग्राहक सेवा में सक्रिय रूप से विविधता, समानता का समावेशन करते हैं। इसे देखते हुए यह सलाह दी गई है कि फर्मों को अपने विज्ञापनों को वास्तविक आंतरिक प्रक्रियाओं से मेल दिखाना चाहिए।