प्रमुख सचिव ने कहा कि जिन दो आरोपों में डॉ. कफील दोषी पाए गए हैं, वह गंभीर भ्रष्टाचार तथा नियमों के घोर उल्लंघन का मामला है। इन आरोपों को जांच अधिकारी द्वारा पूर्णतया सिद्ध पाते हुए यह बताया गया है कि डॉ. कफील सरकारी सेवा में रहते हुए निजी नर्सिंग होम मेडिस्प्रिंग हास्पिटल एण्ड रिसर्च सेन्टर, रुस्तमपुर, गोरखपुर में प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे थे।
डॉ. कफील द्वारा प्रवक्ता, बाल रोग विभाग के पद पर योगदान करने के उपरान्त भी अनाधिकृत रूप से निजी प्रैक्टिस किया जा रहा था और मेडिस्प्रिंग हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेन्टर से जुड़े हुए थे।
प्रमुख सचिव ने कहा कि निलम्बन अवधि के दौरान डॉ. कफील ने 22 सितंबर 2018 को तीन-चार बाहरी व्यक्तियों के साथ जिला चिकित्सालय बहराइच के बाल रोग विभाग में जबरन प्रवेश कर मरीजों का उपचार करने का प्रयास किया गया, जिससे चिकित्सालय में अफरा-तफरी का माहौल बना। डॉ. कफील खान ने सरकारी सेवक के रूप में किया गया। यह कृत्य और मीडिया में प्रसारित की गई भ्रामक जानकारियां अत्यन्त गंभीर कदाचार की श्रेणी में आती हैं।
इस कारण उन पर एक और विभागीय कार्रवाई संस्तुति की गई है, जिनमें उनके ऊपर अनुशासनहीनता, भ्रष्टाचार, कर्तव्य पालन में घोर लापरवाही करना शामिल है। जिसकी जांच के लिए प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण को जांच अधिकारी बनाया गया है। इस प्रकार उनके ऊपर कुल सात आरोप अभी प्रक्रियाधीन है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार मृत्युंजय कुमार और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक शिशिर मौजूद थे।