श्रावस्ती। श्रावस्ती लोकसभा सीट पर न तो मतदाताओं ने न तो मोदी की गारंटी पर भरोसा किया और न ही कांग्रेस के लोकलुभावन वादे पर। राम मंदिर के मुद्दे पर भी जातीय गुणा गणित भारी पड़ी। एक तरफ जहां राम मंदिर, सीएए व एनआरसी जैसे मुद्दों के विरोध में मुस्लिम मतदाताओं ने जमकर भाजपा के खिलाफ सपा को वोट किया। वहीं सपा का यादव, राम शिरोमणि वर्मा का कुर्मी मतदाता सजातीय वोट में बंट गया। कुर्मी, यादव, मुस्लिम व भाजपा के टिकट वितरण से नाराज सवर्ण मतदाताओं ने भी सपा के पक्ष में मतदान किया।
n रंग नहीं ला सकी भाजपा की रणनीति : श्रावस्ती लोकसभा सीट पर अपनी जीत पक्की करने के लिए भाजपा की ओर से महसी विधायक दिलीप वर्मा व उनकी पूर्व विधायक व पूर्व एमएलसी पत्नी माधुरी वर्मा को भाजपा में शामिल कराया। जिन्होंने कुर्मी मतदाताओं को भाजपा के पक्ष में मतदान करने के लिए मेहनत तो की। लेकिन भाजपा की रणनीति व विधायक दंपती की मेहनत रंग नहीं ला सकी।
n अपने बराबर भी सजातीय मत नहीं दिला सके एमएलसी : भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष व एमएलसी पदम सेन चौधरी ने भाजपा के पक्ष में सजातीय वोटों के ध्रुवीकरण का पुरजोर प्रयास किया। लेकिन उनकी मेहनत रंग नहीं ला सकी। विगत विधानसभा चुनाव में उन्हें जितना कुर्मी मत मिला था। उतना मत वह भाजपा को नहीं दिला सके।
n टिकट वितरण में मनमानी पड़ी भारी : श्रावस्ती के पूर्व सांसद व जिला पंचायत अध्यक्ष दद्दन मिश्रा चुनाव हारने के बाद लगातार क्षेत्र में बने रहे। शायद ही कोई ऐसा कार्यकर्ता व पदाधिकारी रहा हो जिसके बुलाने पर वह उसके घर न गए हों। भाजपा की ओर से साकेत मिश्रा को पार्टी प्रत्याशी बनाए जाने के बाद भाजपा के एक खेमे ने इसका खुल कर विरोध भी किया। इतना ही नहीं उनके समर्थकों ने पार्टी कार्यालय भिनगा में धरना-प्रदर्शन कर जिलाध्यक्ष के माध्यम से प्रदेश व केंद्रीय नेतृत्व को ज्ञापन भी सौंपा। इसके बावजूद टिकट में कोई बदलाव नहीं हुआ। ऐसे में पार्टी के समर्थक भी दबे जुबान यह मान रहे हैं कि टिकट वितरण में पार्टी की मनमानी
भारी पड़ी।
n मुस्लिम मतदाताओं ने गठबंधन पर जताया भरोसा : लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान मुस्लिम मतदाता भाजपा के पक्ष में मतदान करने का दावा करते रहे। लेकिन जब मतदान की बारी आई तो उन्होंने एकतरफा इंडिया गठबंधन को मत दिया। यही कारण रहा कि मुस्लिम प्रत्याशी होने के बावजूद मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में भी सपा प्रत्याशी ने अपनी जीत दर्ज कराई।
n पीडीए पर जताया भरोसा : इंडिया गठबंधन विशेषकर सपा मुखिया की ओर से इस बार पीडीए का नारा दिया गया था। साथ ही भाजपा के सत्ता में आने के बाद संविधान में संशोधन करने की बात कही जा रही थी। जिसे अयोध्या सांसद लल्लू सिंह के बयान ने हवा दी। शायद यही कारण रहा कि भाजपा का दलित लाभार्थी वोट बसपा को हारता देख चुपके से गठबंधन की तरफ खिसक गया।
n भिनगा के मतदाताओं ने सपा को दिलाई जीत : जिले की दो विधानसभा सीटों में से भिनगा सीट जहां सपा के पास है। वहीं श्रावस्ती विधानसभा सीट भाजपा के कब्जे में है। ऐसे में दोनों ही विधायकों ने इस सीट पर जीत के लिए अपनी-अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी। इसके बावजूद जहां श्रावस्ती विधायक रामफेरन पांडेय की मेहनत अपेक्षित रंग नहीं ला सकी। इस सीट पर वह अपनी विधानसभा में खुद को प्राप्त मतों से अधिक मत दिलाने के बाद भी जीत न दिला सके। वहीं सजातीय प्रत्याशी होने के कारण भिनगा विधायक इंद्राणी वर्मा की मेहनत रंग लाई। अपने विधानसभा सीट पर उन्होंने राम शिरोमणि वर्मा को बंपर जीत दिलाई।