यूपी विधानसभा का मानसून सत्र 14 अगस्त को शुरू हुआ था। उस दिन पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को श्रद्घांजलि देने के बाद सदन को स्थगित कर दिया गया था।
इसके बाद 17 अगस्त को जब सदन शुरू हुआ तो शुरु होते ही सदन में हंगामा शुरू हो गया। सभी विपक्षी पार्टी पहले से हंगामे की तैयारी से आईं थीं। सभी पार्टियों के पास हंगामे से जुड़े बैनर और पोस्टर थे।
मुख्य विपक्षी पार्टी बसपा ने कानून व्यवस्था को मुद्दा बनाते हुए हंगमा किया तो वहीं लोकदल के सदस्य अलग राज्य की मांग करते हुए नारेबाजी करते पाए गए।
भाजपा में सरकार के इस विरोध में पीछे नहीं रही। बीजेपी के सदस्यों ने भी वेल में आकर नारेबाजी की। उनका विरोध सपा सरकार की कथित खराब कानून व्यवस्था पर था। हंगामे के विरोध में सत्ताधारी पार्टी के विधायक भी आक्रामक नजर आए।
35 मिनट में निपट गई कार्यवाही
विधानमंडल के दोनों सदनों में विपक्षी दलों के सदस्यों ने सोमवार को जबरदस्त हंगामा किया। बदहाल कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार और किसानों की अनदेखी पर विपक्षी सदस्यों मे सदन में बैनर लहराए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। हंगामे के चलते प्रश्न प्रहर नहीं हो सका।
विपक्षी सदस्यों के वैल में डटे रहने और नारेबादी के बीच अनुपूरक अनुदान और दो विधेयक पेश करने समेत एजेंडे की संपूर्ण कार्यवाही मात्र 35 मिनट में निपट गई।
विधानसभा की कार्यवाही 11 बजे से प्रारंभ होनी थी। इससे पहले ही बसपा, भाजपा, कांग्रेस और रालोद के सदस्य वैल में आ गए थे। वे हाथों में बैनर लिए हुए थे। वे 'दलितों को भूमिहीन मत करो, काला कानून वापस लो', 'कानून व्यवस्था ध्वस्त है, प्रदेश सरकार मस्त है, जैसे नारे लिखे बैनर लहरा रहे थे।
पश्चिमी यूपी के भाजपा विधायक सुरेश राणा, लोकेन्द्र सिंह, रवीन्द्र भड़ाना आदि मेरठ में शोहदों द्वारा फौजी की हत्या और गन्ना मूल्य भुगतान के लिए नारे लगा रहे थे। आग्रह के बावजूद सदस्यों के सीट पर न जाने पर विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने 11.05 बजे सदन की कार्यवाही 20 मिनट के लिए स्थगित कर दी। इस पर भाजपा सदस्य वैल में ही बैठ गए।
नारेबाजी के बीच मुख्यमंत्री ने पेश किया सप्लीमेंट्री बजट
11.25 बजे पुन: कार्यवाही प्रारंभ हुई तो बसपा, भाजपा, कांग्रेस और रालोद सदस्य फिर हंगामा करने लगे। उनके शांत न होने पर विधानसभा अध्यक्ष ने 12.20 बजे तक फिर सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
12.20 बजे सदन की कार्यवाही फिर प्रारंभ होते ही फिर हंगामा शुरू हो गया। इस बीच मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वित्तीय वर्ष्र 2015-16 के अनुपूरक अनुदान मांगे रखीं।
लगातार नारेबाजी के बीच सीएजी की तीन रिपोर्ट, लोकायुक्त के दो विशेष प्रतिवेदन, राज्य विधानमंडल रिवाल्विंग फंड (प्रथम संशोधन) नियमावली 2015, राज्य विधानमंडल (सदस्यों की उपलब्धियां एवं पेशन) (पच्चीसवां संशोधन) नियमावली 2015 समेत दो विधेयक सदन के पटल पर रखे। इस बीच भाजपा व कांग्रेस सदस्य वैल में धरने पर बैठे रहे और बसपा व रालोद सदस्य बैनर लहराते हुए नारेबाजी करते रहे।
भाजपा के सदस्यों एक बार आसन की तरफ बढऩे की कोशिश भी की लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। लगातार हंगामा जारी रहने पर एजेंडे के बिंदुओं निपटाते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने 12.55 बजे मंगलवार 11 बजे तक के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी।