हरिशयनी एकादशी के साथ ही शुक्रवार रात से चातुर्मास शुरू हो गया। अब चार मास भगवान शयन करेंगे और तब तक मांगलिक कार्य भी नहीं होंगे। भगवान 13 नवंबर को देवोत्थानी एकादशी पर ही जागेंगे और उसी के बाद विवाह की लग्न मिल सकेंगी।
हरिशयनी एकादशी के साथ ही शुक्रवार रात से चातुर्मास शुरू हो गया। अब चार मास भगवान शयन करेंगे और तब तक मांगलिक कार्य भी नहीं होंगे।
भगवान 13 नवंबर को देवोत्थानी एकादशी पर ही जागेंगे और उसी के बाद विवाह की लग्न मिल सकेंगी।
देवशयनी एकादशी में ऋषि-मुनि भ्रमण वास के लिए एक ही स्थान पर रुकेंगे। इसी के साथ वैवाहिक मांगलिक कार्य भी रुके रहेंगे। हालांकि अंतिम वैवाहिक लग्न 16 जुलाई को थी।
महानगर निवासी आचार्य प्रदीप ने बताया कि, आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी हरिशयनी एकादशी शुक्रवार से चातुर्मास शुरू हुआ। इस दौरान चार महीने भगवान विष्णु निद्रामग्न रहेंगे।
अब जब तक देवता जाग नहीं जाते तब तक मांगलिक कार्य रुके रहेंगे। आचार्य ने बताया कि, चूंकि वर को नारायण का ही रूप माना जाता है, इसलिए उनके विश्राम काल में वैवाहिक कार्य करना श्रेयस्कर नहीं रहता।
अब 13 नवंबर को कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी (जिसे कि देवोत्थानी एकादशी या हरिप्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है) पर देवताओं के जागने के साथ ही शादियां, विवाह आदि होने शुरू हो जाएंगे।
एकादशी पर शाम को घरों में लोगों ने विष्णु पूजन कर उन्हें दुग्ध धारा से अभिषेक कराया।