रविशंकर गुप्ता
लखनऊ। राजकीय इंटर कॉलेजों में शिक्षकों के तबादले के बीच तैनाती की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जहां कहीं शिक्षक हैं तो पढ़ने वाले बच्चे नहीं और कहीं बच्चे हैं तो पढ़ाने वाला कोई नहीं। जरूरत के मुताबिक शिक्षकों की तैनाती न होने से राजकीय कॉलेजों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
ताजा मामला राजकीय बालिका छोटी जुबिली इंटर कॉलेज का है। यहां मौजूदा समय में इंटर गणित की एक भी छात्रा नहीं है, इसके बावजूद अमेठी से गणित की प्रवक्ता को यहां तैनात कर दिया गया। वहीं, छोटी जुबिली से करीब एक किलोमीटर दूर राजकीय बालिका इंटर कॉलेज शाहमीना में करीब 300 छात्राएं पिछले पांच साल से गणित शिक्षक का इंतजार कर रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब शाहमीना में गणित शिक्षक की जरूरत थी तो प्रवक्ता को छोटी जुबिली की बजाय वहां क्यों नहीं भेजा गया?
इसी तरह राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज बॉयज में भी इतिहास विषय की दो शिक्षिकाओं की तैनाती उस समय कर दी गई, जब यहां इतिहास विषय के बच्चे ही नहीं थे। इनमें से एक शिक्षिका जिस कॉलेज से तबादला पाकर आईं, वहां भी इतिहास विषय के बच्चे नहीं थे।
यानी तस्वीर साफ है... जहां शिक्षकों की जरूरत है, वहां पद खाली हैं और जहां जरूरत नहीं है, वहां शिक्षक तैनात हैं। गरीब बच्चों को शिक्षित करने में राजकीय इंटर कॉलेजों की भूमिका अहम है। खासकर नाम के साथ ‘जुबिली’ जुड़ा हो तो उसे जिले के श्रेष्ठ कॉलेजों में माना जाता है लेकिन राजधानी के राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज बॉयज और राजकीय बालिका इंटर कॉलेज (छोटी जुबिली) में शिक्षकों की कमी से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
बच्चों का कहना है कि उन्हें पढ़ाई के लिए बाहर कोचिंग का सहारा लेना पड़ता है। तभी बोर्ड परीक्षा में पास हो पाते हैं। यही वजह है कि इन कॉलेजों का लंबा इतिहास होने के बावजूद कई वर्षों से यहां से कोई स्टेट टॉपर या जिला टॉपर नहीं निकला है।
विज्ञान के चारों पद खाली, गेस्ट के सहारे पढ़ाई
राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज बॉयज में वर्षों से विज्ञान के चारों पद खाली हैं। फिजिक्स के प्रवक्ता भी नहीं हैं। किसी तरह गेस्ट टीचर के सहारे पढ़ाई चल रही है। कॉलेज के प्रधानाचार्य सुमित श्रीवास्तव कहते हैं कि जो व्यवस्था है, उसी में काम चलाना पड़ रहा है।
छोटी जुबिली में पांच प्रवक्ता और तीन एलटी के पद खाली
राजकीय बालिका छोटी जुबिली में पांच विषयों के प्रवक्ता नहीं हैं, जबकि तीन एलटी के पद भी खाली हैं। अंग्रेजी, नागरिक शास्त्र और कॉमर्स के शिक्षक नहीं हैं। करीब 500 छात्राएं यहां पढ़ती हैं। ऐसे में यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम कैसे बेहतर होगा, यह देखने वाली बात है। कॉलेज की प्रधानाचार्य अंकिता सिंह कहती हैं कि शिक्षकों की तैनाती शासन स्तर पर होती है।