शहर में कितनी पेयजल की आवश्यकता है और कितनी सड़क की? ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए क्या उपाय किए जाएं और शहर को संवारने के लिए क्या जरूरी है? मेट्रो के चलते इन सब पर कितना प्रभाव पड़ेगा?
इस सबका पता लगाने के लिए शहर का रिवाइज सिटी डवलपमेंट प्लान (सीडीपी) बनाया जाना है। इसके लिए करीब 20 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं लेकिन इस महत्वपूर्ण काम को कार्यदायी संस्था और नगर निगम के अधिकारी गम्भीरता से नहीं ले रहे हैं।
निजी कंपनी कमरे में बैठकर प्लान बना रही है और नगर निगम के अधिकारी आंखें मूंदे हैं। सीडीपी बनाने का काम नोएडा की कंपनी सेनेस कंसलटेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया है।
करीब दो महीने पहले नगर निगम ने कंपनी से करार किया है। करार के तहत कंपनी को जेएनएनयूआरएम द्वितीय चरण केलिए सीडीपी तैयार करना है। कंपनी को शहर की मौजूदा अवस्थापना सुविधाओं और भविष्य की जरूरत को ध्यान में
रखते हुए प्लान बनाना है।
इसके लिए शहर का सर्वे बेहद जरूरी है लेकिन निजी कं पनी नगर निगम के नाम पर सरकारी विभागों से आंकड़े लेकर उनसे ही सीडीपी बनाने की तैयारी कर रही है। विडंबना यह है कि सीडीपी केलिए करीब 20 लाख रुपये नगर निगम निजी कंपनी को
देगा उसके बाद भी निजी कंपनी नगर निगम के संशाधनों का इस्तेमाल कर रही है। नगर निगम केहवाले से ही सरकारी विभागों को पत्र जारी करा डेटा मंगाया जा रहा है और नगर निगम मीटिंग हाल का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
इससे कंपनी को न तो पैसा खर्च करना पड़ रहा है और नही सर्वे कर डाटा जुटाने की जरूरत पड़ रही है। कुल मिलाकर सीडीपी तैयार कराए जाने केनाम पर लाखों रुपये बर्बाद हो रहे हैं।
इस बारे में निजी कंपनी की ओर से सीडीपी का काम देखने वाली प्रतिनिधि दया हांडा का कहना है कि अभी आंकड़े जमा करने का काम हो रहा है। फील्ड में जाकर बहुत काम नहीं करना है। रेंडम आधार पर आंकड़ों की क्रॉस चेकिंग की जाएगी।