केंद्र सरकार ने सब्सिडी देने से हाथ खींचे, टेंडर निरस्त, इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा बढ़ने पर फिलहाल ब्रेक
राजधानी के 60 हजार लोगों के 100 इलेक्ट्रिक एसी सिटी बसों में आरामदायक सफर का सपना फिलहाल टूट गया है।
ऐसा केंद्र सरकार के कंपनियों को प्रति बस खरीद के लिए दी जाने वाली 45 लाख रुपये की सब्सिडी से पल्ला झाड़ने से हुआ है।
इसके चलते बसों का टेंडर निरस्त कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक कई कंपनियों ने टेंडर डाले थे, जिसमें एक बस बनाने वाली भी थी।
इन्होंने बस संचालन के बहुत ज्यादा रेट दिए थे। केंद्र सरकार ने इस पर आपत्ति दर्ज कराते हुए शासन को बस खरीद के लिए दी जाने वाली सब्सिडी देने से इन्कार कर दिया।
केंद्र ने फैसला किया है कि बस संचालन को सब्सिडी देने का चयन शहर के हिसाब से करेंगे। कंपनी द्वारा जिन इलेक्ट्रिक एसी बसों का संचालन होता, उसकी एक बस की कीमत लगभग 1.20 करोड़ रुपये है। केंद्र ने इसे खरीदने के लिए प्रति बस 45 लाख की सब्सिडी देने का आश्वासन दिया था।
खटाई में पड़ा आरामदायक सफर
सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनी ठोंक पीटकर 150 खटारा सिटी बसोें से यात्रियाें को सफर करवा रही है। इनमें से रोजाना चार-पांच बसें बीच सफर दम तोड़ देती हैं। इससे यात्री परेशान होते हैं। ऐसे में 100 इलेक्ट्रिक एसी बसें सड़कों पर उतरने से आरामदायक सफर की उम्मीद थी। अब इसके लिए कम से एक साल इंतजार करना पड़ सकता है। अब दोबारा नए सिरे से टेंडर निकाले जाएंगे।
टेंडर में अधिक आए थे रेट
लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज कंपनी के प्रबंध निदेशक आरिफ सकलेन ने बताया कि अनुबंध पर बस संचालन को कंपनियों के रेट बहुत अधिक थे। इन पर भारी उद्योग मंत्रालय को आपत्ति थी। इस कारण सिटी बस की टेक्निकल एवं फाइनेंशियल बिड खुलने के बाद उसे निरस्त कर दिया गया।
नए सिरे से तैयार होगा प्रस्ताव
संयुक्त निदेशक नगरीय परिवहन निदेशालय, अजीत सिंह ने बताया कि लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज कंपनी के बेड़े में 100 इलेक्ट्रिक एसी सिटी बसों को अनुबंध पर शामिल करने की जो प्रक्रिया चल रही थी वह निरस्त हो गई है। सिटी बसों के संचालन को नये सिरे से प्रस्ताव तैयार होगा।