दिवाली पर आलमबाग एवं कैसरबाग बस अड्डे पर क्रमश: 2000 और 3000 यात्री उमड़े तो उन्हें संभालना मुश्किल हो गया।
यात्रियों की आपस में बस में प्रवेश करने के लिए मारामारी होने लगी। हालांकि अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने आनन-फानन में यात्रियों को बस मुहैया कराकर उनकी रवानगी का सिलसिला शुरू किया तो दोपहर बाद फुरसत मिली।
इसके लिए 70 अतिरिक्त बसों का संचालन करना पड़ा। कैसरबाग बस अड्डे के कर्मियों ने बताया कि रविवार सुबह पांच बजे से ही यात्रियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया।
आठ बजे तक गोंडा, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, फैजाबाद, हरदोई, सीतापुर जाने वाले करीब 3000 यात्री एकत्र हो गए।
ऐसे में जो बस आए तुरंत फुल हो जाए। तमाम यात्रियों को जब बस में जगह नहीं मिली तो अड्डे से बाहर निकलते ही वे बस की छत पर सवार हो गए।
बस अड्डे के प्रभारी को खबर लगी तो उन्होंने यात्रियों को उतरवाया। इसके बाद कैसरबाग से 40 अतिरिक्त बसों से यात्रियों को गंतव्य तक रवाना किया गया।
आलमबाग बस अड्डे पर भी वाराणसी, जौनपुर, गोरखपुर, बस्ती, देवरिया, आजमगढ़, मऊ एवं गाजीपुर जाने वाले 2000 से अधिक यात्रियों का रेला पहुंचा तो अफरा-तफरी मच गई।
चारबाग डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक आरके त्रिपाठी ने बताया कि 30 अतिरिक्त बसों से सिर्फ गोरखपुर के यात्रियों को भेजा गया।
इसके बाद सुल्तानपुर और आजमगढ़ के लिए भी अतिरिक्त बसों का संचालन करना पड़ा। त्रिपाठी ने बताया कि दोपहर बाद बस अड्डे पर सन्नाटा पसर गया।