मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए नहीं मिला एक भी प्रस्ताव
मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए वित्तविहीन विद्यालयों से एक भी प्रस्ताव राज्य चयन समिति को नहीं मिला है। जबकि प्रस्ताव भेजने की अंतिम तिथि (30 जून) समाप्त हो चुकी है। मालूम हो कि पहली बार शासन ने वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार योजना शुरू की है। इसके लिए वित्तविहीन विद्यालयों से शिक्षकों के नामों का प्रस्ताव मांगा गया था।
मंडलीय समिति द्वारा चयनित शिक्षकों का प्रस्ताव राज्य चयन समिति को 30 जून तक उपलब्ध कराना था। अंतिम तिथि बीत चुकी है और जिले से एक भी वित्तविहीन शिक्षक का प्रस्ताव पुरस्कार के लिए समिति को नहीं भेजा गया। किसी भी शिक्षक ने इसके लिए आवेदन तक नहीं किया। जिले में करीब 700 से ज्यादा वित्तविहीन विद्यालय हैं। जिनमें करीब दो हजार से ज्यादा शिक्षक कार्यरत हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि इन विद्यालयों के एक भी शिक्षक का प्रस्ताव विभाग को नहीं मिला है। मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार देने की तिथि अभी तय नहीं की गई है। जिले से प्राप्त शिक्षकों के प्रस्ताव को मंडलीय समिति द्वारा चयन करना होता है। हर मंडल से तीन शिक्षकों का नाम का प्रस्ताव राज्य चयन समिति को भेजा जाना था। किसी भी नाम का प्रस्ताव न आने पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने जुलाई तक शिक्षकों के नामों का प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया है।
... तो मानकों पर खरे नहीं उतर रहे वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षक
पुरस्कार के लिए वित्तविहीन शिक्षक को 15 वर्ष तक का नियमित शिक्षण का अनुभव होना अनिवार्य है। वहीं, प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापकों के लिए 20 वर्ष तक का नियमित अनुभव होना आवश्यक है। बताया जा रहा है कि इसी नियम की वजह से किसी भी विद्यालय ने अपना प्रस्ताव नहीं भेजा। वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों का नियमित अनुभव नहीं है। चयन के लिए शिक्षकों का मूल्यांकन भी किया जाएगा। इसमें पठन-पाठन के अलावा, छात्रों के नामांकन समेत कई बिंदु शामिल हैं। कितने प्रशिक्षण कार्यक्रम में सम्मिलित हुए हैं, किसी प्रकार की शिकायत है या नहीं, तकनीकी से कितने जुड़े हैं आदि। इन मानकों पर भी वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षक पीछे हैं।