कक्षा
एक से आठ तक के पिछड़े वर्ग के छात्रों को वजीफे की सुविधा खत्म किए जाने
की तैयारी कर ली गई है।
पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशालय ने इस बाबत शासन को
पत्र भेजा है।
साथ ही इस मद में आवंटित बजट को दशमोत्तर कक्षाओं के
विद्यार्थियों पर खर्च करने की अनुमति भी मांगी है।
पिछड़े
वर्ग के आठवीं तक के करीब सवा करोड़ छात्रों को वजीफा देने के लिए 520
करोड़ रुपये की जरूरत है, लेकिन राज्य सरकार ने इस वर्ग के कक्षा-1 से
कक्षा-10 तक की छात्रवृत्ति के लिए महज 233 करोड़ रुपये ही दिए हैं।
कक्षा-9 और 10 के छात्रों को छात्रवृत्ति देने पर ही 80 करोड़ रुपये खर्च
होंगे। ऐसे में आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए 153 करोड़ रुपये ही
बचेंगे।
इस रकम से आठवीं तक के एक तिहाई छात्रों को भी वजीफा नहीं दिया जा
सकता।
यही तर्क देते हुए पिछड़ा वर्ग
कल्याण निदेशालय ने शासन को योजना बंद करने के लिए पत्र लिखा है।
निदेशालय
का कहना है कि इस राशि का कक्षा-10 से ऊपर के छात्रों को छात्रवृत्ति देने
में इस्तेमाल कर लिया जाए तो बेहतर रहेगा।