पेंशन के बाद अब जल निगम में वेतन का संकट गहरा गया है। प्रदेश
भर में करीब सात हजार कर्मचारियों को नवंबर का वेतन मिलने के आसार नहीं है।
निगम के पास इस समय वेतन देने के लिए पैसा नहीं है। इस संकट से निपटने के
लिए निगम को शासन से मदद की उम्मीद है।
मांगों को लेकर कार्यरत कर्मचारी इस
समय आंदोलित भी चल रहे हैं। अब वेतन का नया संकट सामने आने के बाद निगम का
माहौल गरमा सकता है।
जल निगम के प्रदेश भर
में करीब 18,000 कर्मचारी हैं। इनके वेतन पर हर माह करीब 45 करोड़ रुपये
खर्च करने पड़ते हैं। निगम की आमदनी का जरिया कार्यदायी संस्था के रूप में
अन्य विभागों का कार्य करने पर मिलने वाल सेंटेज है।
पिछले कुछ सालों में
निगम को सरकार की प्राथमिकता वाले कार्यों को करने पर सेंटेज नहीं मिला। इस
कारण करीब 250 करोड़ रुपये सरकार पर बकाया है। इस भुगतान की मांग को लेकर
निगम सरकार से लगातार प्रयास कर रहा है।
तीन माह पहले शासन ने जल निगम को
करीब 120 करोड़ का भुगतान किया था। अब यह पैसा खर्च हो गया है और सरकार ने
बकाया सेंटेज की नई किस्त जारी नहीं की है।
इस कारण निगम कर्मियों के नवंबर
के वेतन पर संकट आ गया है। जल निगम के प्रबंध निदेशक एके मित्तल का कहना
है कि सरकार से सेंटेज की बकाया किस्त मिलनी है।
पैसा मिलने से वेतन का कोई
संकट नहीं रहेगा। उम्मीद है दिसंबर के पहले सप्ताह तक
कर्मचारियों को वेतन मिल जाएगा।
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