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महिला हेल्पलाइन के कर्मचारियों को सात महीने से नहीं मिला वेतन, काम ठप, नहीं रिसीव हुई कोई कॉल

Wed, 29 Jan 2020 11:32 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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helpline - फोटो : अमर उजाला
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सात माह से वेतन न मिलने से आक्रोशित कर्मचारियों ने महिला हेल्पलाइन ‘181’ सेवा मंगलवार को ठप कर दी। पूरे दिन हिंसा पीड़ित महिलाओं की न तो कोई कॉल रिसीव की गई और न उनके रेस्क्यू के लिए कोई वाहन ही निकला।

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कर्मचारियों ने आशियाना स्थित आशा ज्योति केंद्र के बाहर प्रदर्शन भी किया। कर्मचारी महिला कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्वाति सिंह से मिलने भी पहुंचे थे, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अब वे बुधवार को मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रखेंगे।

प्रदेश में हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए सरकार ने मार्च 2016 में इस अति महत्वाकांक्षी सेवा की शुरुआत की थी। इसके लिए राजधानी में अत्याधुनिक तकनीक आधारित कॉल सेंटर बनाया गया है। कोई भी पीड़ित महिला किसी भी समय 181 नंबर पर फोन कर मदद मांग सकती है।
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पीड़िता के रेस्क्यू के लिए मौके पर वैन भेजने की भी व्यवस्था है। बेहतर सेवा के बावजूद इस सेवा का संचालन करने वाली संस्था को रकम का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इस वजह से कर्मियों को पिछले साल जुलाई से ही वेतन नहीं मिला है।

प्रमुख सचिव से लेकर मंत्री तक लगाई गुहार

भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके कर्मचारियों ने वेतन के लिए कई बार विभाग की प्रमुख सचिव मोनिका एस गर्ग से लेकर मंत्री तक से गुहार लगाई, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। इससे परेशान कर्मचारियों ने मंगलवार से काम करना ही बंद कर दिया।

महिला कर्मचारियों ने तो लॉगइन तक नहीं किया। पूरे दिन विभिन्न जिलों से फोन आते रहे, लेकिन कर्मचारियों ने कॉल रिसीव नहीं की। कर्मचारियों का कहना है कि नौकरशाही की अड़ंगेबाजी की वजह से ‘181 हेल्पलाइन’ का संचालन करने वाली संस्था का पिछले साल मार्च से ही भुगतान नहीं किया गया, जबकि सरकार के साथ किए गए अनुबंध में एडवांस में भुगतान करने की बात कही गई है।
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प्रतिमाह आती हैं 10 हजार कॉल

राजधानी स्थित कॉल सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक यहां हर महीने औसतन 10 हजार कॉल रिसीव की जाती हैं। इनमें से करीब 5000 महिलाओं को रेस्क्यू कराना पड़ता है।

8 मार्च 2016 को शुरू की गई इस सेवा के माध्यम से प्रदेश में अब तक 5.39 लाख से अधिक पीड़िताओं की कॉल रिसीव की गईं।

इनमें से करीब ढाई लाख महिलाओं का रेस्क्यू किया चुका है। मुख्यमंत्री ने विशेष रुचि लेते हुए इस सेवा का प्रदेश भर में विस्तार कराया था।
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