भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके कर्मचारियों ने वेतन के लिए कई बार विभाग की प्रमुख सचिव मोनिका एस गर्ग से लेकर मंत्री तक से गुहार लगाई, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। इससे परेशान कर्मचारियों ने मंगलवार से काम करना ही बंद कर दिया।
महिला कर्मचारियों ने तो लॉगइन तक नहीं किया। पूरे दिन विभिन्न जिलों से फोन आते रहे, लेकिन कर्मचारियों ने कॉल रिसीव नहीं की। कर्मचारियों का कहना है कि नौकरशाही की अड़ंगेबाजी की वजह से ‘181 हेल्पलाइन’ का संचालन करने वाली संस्था का पिछले साल मार्च से ही भुगतान नहीं किया गया, जबकि सरकार के साथ किए गए अनुबंध में एडवांस में भुगतान करने की बात कही गई है।
राजधानी स्थित कॉल सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक यहां हर महीने औसतन 10 हजार कॉल रिसीव की जाती हैं। इनमें से करीब 5000 महिलाओं को रेस्क्यू कराना पड़ता है।
8 मार्च 2016 को शुरू की गई इस सेवा के माध्यम से प्रदेश में अब तक 5.39 लाख से अधिक पीड़िताओं की कॉल रिसीव की गईं।
इनमें से करीब ढाई लाख महिलाओं का रेस्क्यू किया चुका है। मुख्यमंत्री ने विशेष रुचि लेते हुए इस सेवा का प्रदेश भर में विस्तार कराया था।