इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) में आरोपी सपा विधायक मुकेश श्रीवास्तव की अपने खिलाफ चल रहे पांच मामलों को एक करने की याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी है।
हाईकोर्ट का कहना है कि फिलहाल मामला साक्ष्य जुटाने के चरण में है, ऐसे मौके पर जांच पर असर डालने वाला कोई कदम उठाना उचित नहीं होगा।
हालांकि, हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को छूट दी है कि अगर वह चाहे तो मामलों में समान गवाहों की सुनवाई के लिए एक ही तारीख तय कर सकती है। कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते मुकेश हाल ही में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे।
याचिका में मुकेश श्रीवास्तव ने कहना है कि उनके खिलाफ एफआईआर घोटाले में कई मुकदमे दर्ज हैं। 23 फरवरी 2012 को सीबीआई नई दिल्ली द्वारा एफआईआर दर्ज की गई।
इसके बाद कुल पांच एफआईआर उन पर दर्ज की गई, जिन पर चार्जशीट भी बनी हैं। इस तरह उनके खिलाफ ट्रायल कोर्ट में पांच मुकदमे चल रहे हैं।
याचिका ने दी गई थीं ये दलीलें
पुलिस सभी चार्जशीट 23 फरवरी की एफआरआई के अनुसार तैयार की है, इन्हें 28 फरवरी 2014 को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया।
मुकेश का कहना है कि सभी चार्जशीट में श्रावस्ती का तत्कालीन सीएमओ डॉ. एसके महराज पहला आरोपी हैं और गवाहों की सूची समान है। याची का कहना था कि जब सभी आरोप समान हैं, अपराधों की प्रकृति समान है, तब ट्रायल भी सभी मुकदमों का एक साथ होना चाहिए। या फिर एक ही चार्जशीट बनाकर ट्रायल होना चाहिए। साथ ही कहा गया कि पांच अलग केस चलाने पर ट्रायल में समय लगेगा।
इसी याचिका पर हाईकोर्ट की एकल पीठ द्वारा मई 2015 को आदेश में कहा गया था कि सभी मामलों में तथ्य अलग हैं, ऐसे में उन्हें एक साथ नहीं लिया जा सकता। मामलों पर सुनवाई जारी रखने को कहा गया था।
एफआईआरएक जैसी पर घोटाला अलग-अलग जगहों से जुड़ा
जस्टिस अमेरश्वर प्रताप साही ने कहा कि भले ही एफआईआर एक जैसी हो, लेकिन घोटाला अलग-अलग जगहों से जुड़ा है। यही वजह है कि पांच अलग अलग केस दर्ज किए गए हैं और अलग चार्जशीट बनी हैं।
घोटाले से जुड़ी पांच फर्म बहराइच व श्रावस्ती की हैं और एक लखनऊ की। भले ही सभी के टेंडर एक ही सीएमओ ने मंजूर किए हों, लेकिन इसी वजह से एक ही चार्जशीट बनाने का तर्क नहीं दिया जा सकता।
सभी मामलों में सामने आए साक्ष्य एक दूसरे से कुछ भिन्नता रखते हैं। ऐसे में अलग-अलग चार्जशीट बनाने की जरूरत थी।
याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि फिलहाल साक्ष्य सामने आ रहे हैं, अत: इस समय हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। हालांकि पीठ ने ट्रायल कोर्ट को छूट दी है कि एक ही तरह के मामलों में गवाही के लिए एक ही तारीख पर सुनवाई कर सकती है।
इस तरह किए गए घोटाले
मुकेश श्रीवास्तव बहराइच की पयागपुर सीट से कांग्रेस पार्टी के टिकट पर एमएलए बने। उन पर एनएचएचएम घोटाल में डिमांड ड्राफ्ट लेने जैसे साक्ष्य सामने आ चुके हैं। वे सविता श्रीवास्तव के पति बालेश्वर प्रताप श्रीवास्तव के भाई है। सविता मैसर्स बीएल एंटरप्राइजेज की मालिक हैं और बालेश्वर मेडिसिन टाइम्स के।
मामला 1
सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार इन दोनों फर्म के कोटेशन को आधार बनाकर दवाओं की सप्लाई हुई, जिसकी वजह से एनआरएचएम घोटाला हुआ था। इन पर जो आरोप लगे वे चार जिले श्रावस्ती, बहराइच, गोंडा और बलरामपुर से जुड़े थे।
वहीं डॉ. एसके महराज जनवरी 2009 से मार्च 2009 के बीच श्रावस्ती का सीएमओ थे और पांचों मामलों में कॉमन आरोपी हैं। आरोप हैं कि उन्होंने हाथ से लिखे कोटेशन के आधार पर पांच दवा फर्मों से 14 तरह की दवाओं की खरीद की थी।
ये फर्में थीं, मैसर्स सृष्टि एंटरप्राइजेस, केडीसी रोड बहराइच, मैसर्स मेडिसिन टाइम्स, हॉस्पिटल रोड बहराइच, मैसर्स बीएल एंटरप्राइजेस, केडीसी रोड बहराइच, मैसर्स बबलू मेडिकल एजेंसी, भिनगा श्रावस्ती और मैसर्स भारत मेडिकल एजेंसी, भिनगा श्रवास्ती।
इन पांचों फर्मों पर मुकेश श्रीवास्तव का नियंत्रण था। दवा खरीद के जो कोटेशन दिए गए, वे उनके करीबी रिश्तेदारों द्वारा दिए गए। इसी तरह पूरा षड्यंत्र रचा गया।
ऐसे थे ये चार मामले
मामला- दो
श्रावस्ती में 276 आइटम एनआरएचएम के तहत खरीदे गए थे। इनमें फर्नीचर, दवाएं, उपकरण, केमिकल आदि शामिल थे। इसमें मैसर्स मेडिसिन टाइम्स, कानूनगोपुरा बहराइच, मैसर्स बीएल एंटरप्राइजेस, केडीसी रोड बहराइच, मेसर्स सृष्टि एंटरप्राइजेस, केडीसी रोड बहराइच,मेसर्स श्री दुर्गा एंटरप्राइजेस, लालबाग लखनऊ शामिल थी। यहां भी टेंडर को डॉ. एसके महराज ने मंजूर किया।
मामला- तीन
तीसरा मामला सर्जिकल आइटम की सप्लाई व खरीद का है। इसमें स्टर्लाइज्ड ग्लव्ज, कॉटन अब्जॉर्वेंट्स, पोविडाइन आयोडीन लोशन की खरीद बेहद चलताऊ कोटेशन से की गई।
मामला- चार
यह मामल दवाओं की सप्लाई का था जिसमें मैसर्स यूपी उपभोक्ता सहकारी संघ, फैजाबाद व लखनऊ से खरीद का था। इनमें भी डॉ. एसके महराज मुख्य कर्ताधर्ता था। मुख्य खरीद एनासिड टेबलेट्स, इंटोपिन इंजेक्शन, जेंटामाइसिन इंजेक्शन की थी।
मामला- पांच
दर्ज पांचवें मामले में विभिन्न मेडिसिन व सर्जिकल आइटम की खरीद की गई, जिसमें एनेस्थिसिया किट, डिलीवरी किट, सर्जिकल सिजेरियन किट, आशा किट की सप्लाई शामिल थी।