तीन साल बीतने पर नहीं सुधारी जाएंगी अंकपत्र-प्रमाण पत्र की गलतियां
यूपी बोर्ड के आदेश के बाद डीआईओएस ने सभी स्कूलों को जारी किया निर्देश
यूपी बोर्ड के अंकपत्र और प्रमाण पत्रों में यदि छात्रों के ब्योरे को लेकर कोई संशोधन होना है तो वह तीन साल के भीतर ही किया जाएगा। इसके बाद इसमें सुधार कराना संभव नहीं होगा। बोर्ड के आदेश के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक ने सभी स्कूलों को इसका निर्देश जारी कर दिया है। वहीं तीन साल के अंदर जो भी संशोधन होंगे उसे विभाग द्वारा ही कराना होगा। इसके लिए छात्रों को भटकना नहीं पड़ेगा।
यूपी बोर्ड के अंकपत्र और प्रमाण पत्रों में छात्रों के नाम, स्कूल व अभिभावक के नाम, विषय आदि को लेकर अक्सर त्रुटियां देखने को मिलती हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि बोर्ड द्वाराअंकपत्र और प्रमाण पत्र निर्गत करने की तिथि से तीन वर्ष के अंदर ही उसमें संशोधन करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि इसके बाद यदि कोई भी छात्र संशोधन के लिए आता है तो बोर्ड उसकी जिम्मेदारी नहीं लेगा। बोर्ड ने एक और निर्देश में कहा है कि वर्ष 2017 से 2019 की बोर्ड परीक्षाओं के अंकपत्र व प्रमाण पत्रों में छात्रों के ब्योरे को लेकर त्रुटि है तो उसमें सुधार के लिए विभाग और स्कूल के स्तर से ही संस्तुति के लिए भेजा जाएगा। ऐसे तमाम मामले में विभाग और स्कूल प्रशासन अपना पल्ला झाड़ लेते हैं और छात्र सुधार के लिए अपने स्तर से सीधे क्षेत्रीय कार्यालय पर जाकर प्रयास करते हैं। इस झंझट से छात्रों को मुक्ति मिलेगी।