लखनऊ। पं. दीनदयाल उपाध्याय साहित्यिक सेवा संस्थान के तत्वावधान में खदरा स्थित शिव नगर के शिव पार्क में बुधवार को कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह हुआ। इस दौरान रचनाकारों ने शृंगार, हास्य और ओज की कविताओं से श्रोताओं का खूब मनोरंजन किया।
वरिष्ठ गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना ने अपने चिर-परिचित अंदाज में गीतों की गंगा बहाई। उन्होंने पढ़ा - जो होगा प्रेम में डूबा वो दिल से गुनगुनाएगा, नजर का तीर ऐसा है जिगर के पार जाएगा, सुनें नफरत के सब साये मोहब्बत का मैं सूरज हूं, करो कितनी भी कोशिश पर उजाला रुक ना पाएगा...। डॉ. सर्वेश अस्थाना ने सुनाया - राम तुम्हारे पुत्र धर्म के सामने हम खुद को लेकर शर्मिंदा हैं, पिता को वृद्धाश्रम भेजकर आज भी बेशर्मी से जिंदा हैं...। उन्नाव से आए डॉ. विनय दीक्षित आशु ने भगवान शंकर पर कविता पढ़ी- भोलेनाथ! तुम आज भी भोले के भोले, भक्तों को खिलाते मालपुआ, खुद भांग के गोले।
कवि डॉ. कमलेश शर्मा, जयपुर के अशोक चारण, पार्थ नवीन, बाराबंकी के हास्य कवि प्रमोद पंकज, दिल्ली की कवयित्री कल्पना शुक्ला ने भी रचनाएं पढ़ीं।
कवि पार्थ नवीन और कवयित्री कल्पना शुक्ला सम्मानित
इस अवसर पर राज्यसभा सदस्य एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, विशिष्ट अतिथि प्रकाश पाल, भाजपा नेता नीरज सिंह और पं. आदित्य द्विवेदी ने वर्ष 2025 का पं. दीनदयाल उपाध्याय साहित्यिक सम्मान राजस्थान के कवि पार्थ नवीन और डॉ. रमेश रस्तोगी सम्मान दिल्ली की कवयित्री कल्पना शुक्ला को प्रदान किया। डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि शिव हमारी सनातन संस्कृति व आस्था के आराध्य भगवान हैं। कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक विधायक नीरज बोरा ने साहित्य के सकारात्मक पक्ष पर प्रकाश डाला।