बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी में मासूम बच्ची की मौत के बाद पिता बिलखते हुए शव कंधे पर लादकर घर ले गया। अस्पताल से शव वाहन तक नहीं मुहैया कराया गया। करीब आधा किमी. पैदल चलने के बाद बाद तीमारदारों ने रिक्शा किया। इसके बाद खुले में शव लेकर घर गए।
शासन का सख्त निर्देश है कि कोई भी शव खुले में नहीं लेकर जाने दिया जाएगा। बावजूद इसके अस्पताल प्रशासन की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा। गरीब मरीजों की मौत बाद भी शव मुहैया नहीं कराया जा रहा।
कैसरबाग ख्यालीगंज के रहने वाले प्रमोद की नौ माह की बेटी खुशी को तीमारदारों ने बुधवार दोपहर करीब एक बजे इमरजेंसी में भर्ती कराया था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया।
इकलौती बेटी की मौत के बाद मानो मां-बाप का उसका सब कुछ लुट गया। गम में दिल वैसे ही बैठा जा रहा था, मगर बारी शव घर ले जाने की आई तब भी जिम्मेदारों ने मुंह मोड़ लिया। अस्पताल से बिना शव वाहन मुहैया कराए ही घरवालों को भेज दिया गया।