मेट्रो रेल परियोजना का निर्माण कार्य दिसंबर में हर हाल शुरू हो जाएगा।
मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने मेट्रो की हाईपावर कमेटी की मीटिंग में इसकी घोषणा की।
केंद्र से अनुमोदन मिलने में देरी को देखते हुए यूपी कैबिनेट स्तर पर अनुमोदन प्राप्त कर सबसे पहले अमौसी से आलमबाग के सात किलोमीटर के स्ट्रेच पर काम शुरू करने की घोषणा कर दी गई है।
इसके लिए किसी भी तरह की बाहरी मदद नहीं ली जाएगी। प्रदेश सरकार की ही विभिन्न एजेंसियां तीन वित्तीय वर्षों की किस्तों में धन अदायगी करेंगी।
इसी के जरिए निर्माण कार्य किया जाएगा। दिसंबर-2016 में काम खत्म करने का लक्ष्य है।
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मेट्रो डिपो के लिए लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को 52 एकड़ भूमि दिए जाने का फैसला किया गया है। जबकि बची हुई 31 एकड़ भूमि को एलएमआरसी नियोजित करेगा। मेट्रो के लिए भूमि अर्जित करने के नियमों में भी शिथिलता बरती जाएगी।
नियमत: अधिग्रहण करने वाली एजेंसी 20 प्रतिशत धन डीएम को जमा करना होता है। मगर इस परियोजना में फिलहाल कम धन होने की वजह से यह नियम खत्म किया जाएगा। इसका एप्रूवल भी कैबिनेट से लिया जाएगा।
बैठक में मुख्य सचिव ने पूरी कमेटी को यह स्पष्ट संदेश दिया कि मेट्रो रेल परियोजना का निर्माण हर हाल में इसी वर्ष शुरू कर दिया जाए।
उन्होंने ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा प्रेषित डीपीआर का परीक्षण भारत सरकार द्वारा किया जा रहा है। इसमें अभी समय लगेगा। इसलिए प्रदेश अपने स्तर पर ही अनुमति और बजट के जरिए काम कराएगा।
सबसे पहले अमौसी से आलमबाग
नार्थ-साउथ कॉरीडोर में प्रथम चरण में अमौसी से आलमबाग तक फर्स्ट स्ट्रेच पर राज्य सरकार और प्रमुख एजेंसियों के जरिए वित्तीय मदद लेकर काम करेंगे। सात किमी का यह काम और संचालन 2016 के दिसंबर में शुरू कराया जाएगा।
ये पूरा स्ट्रेच उपरगामी होगा। इसकी शुरुआत होने के साथ ही अगले खंडों में काम का आगाज किया जाएगा। 21 किमी नार्थ साउथ कॉरिडोर को इसी तरह सात सात किमी में बांट कर काम किया जाएगा।
तीन एजेंसियां तीन साल में देगी 350 करोड़
एलएमआरसी को आवास विकास परिषद 200 करोड़, लखनऊ विकास प्राधिकरण 100 करोड़ और औद्योगिक विकास निगम 50 करोड़ रुपये देगा।
तीनों एजेंसियां यह धनराशि तीन वित्तीय वर्षों में उपलब्ध कराएंगी। पहले वित्तीय वर्ष (2013-14) में 20 प्रतिशत, दूसरे वित्तीय वर्ष (2014-15) में 40 प्रतिशत और तीसरे वित्तीय वर्ष (2015-16) में 40 प्रतिशत धनराशि उपलब्ध करानी होगी।
मुफ्त मिलेगी 150 एकड़ भूमि
लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना की फाइनेंशियल इंटर्नल रेट ऑफ रिटर्न (एफआईआरआर) को आठ प्रतिशत से अधिक करने के लिए प्रापर्टी डवलपमेंट (संपत्ति विकास) किया जाएगा।
इसके लिए चक गंजरिया परियोजना की 150 एकड़ भूमि एलएमआरसी को निशुल्क दी जाएगी। इस भूमि पर आवास और कामर्शियल प्रापर्टी बना कर एलएमआरसी बिक्री करेगा। इससे प्राप्त धन भी मेट्रो पर लगाया जाएगा।
पीएसी को मोहारी खुर्द में भूमि
कानपुर रोड स्थित 32वीं वाहिनी पीएसी में मेट्रो के मदर डिपो बनाया जाएगा। इस संबंध में प्रमुख सचिव गृह की अध्यक्षता में गठित उपसमिति की संस्तुतियों को स्वीकार कर लिया गया।
डिपो की स्थापना के संबंध में पीएसी कैंपस की लगभग 52 एकड़ भूमि को गृह विभाग एलएमआरसी को हस्तांतरित करेगा। इसके बदले में एलएमआरसी पीएसी की लगभग 31 एकड़ भूमि पर अपार्टमेंट बनाएगा।
इस पर होने वाला खर्च भी एलएमआरसी ही करेगा। पीएसी वाहिनी का विस्तार गांव मोहारी खुर्द,मोहनलालगंज में किया जाएगा।
अधिग्रहण में एलएमआरसी पर कम दबाव
किसी भी अर्जन प्रस्ताव के लिए प्रस्ताव के साथ 20 प्रतिशत धनराशि डीएम आफिस को जमा कराए जाने की बाध्यता है।
मगर एलएमआरसी का आर्थिक बोझ कम करने के लिए विभिन्न उपयोगों जैसे स्टेशन,डिपो,विद्युत सबस्टेशन के लिए भूमि अर्जन में 20 प्रतिशत व्यय जमा करने की बाध्यता नहीं रहेगी।