प्रदेश के सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों को अब 24 घंटे बिजली आपूर्ति का रास्ता साफ हो गया है। यह फैसला सरकार के सबसे कद्दावर मंत्री मो. आजम खां की पहल पर हुआ।
पावर कार्पोरेशन ने प्रदेश में उच्च शिक्षा से संबंधित सभी शिक्षा संस्थानों को विशेष दर्जा देते हुए उन्हें 220 या 132 केवी प्राथमिक उपकेंद्रों से लोड के मुताबिक स्वतंत्र फीडर के जरिये लगातार बिजली आपूर्ति के लिए हरी झंडी दे दी है।
खास बात यह है कि प्राथमिक उपकेंद्र से विश्वविद्यालय तक पांच किलोमीटर तक लंबा स्वतंत्र फीडर सरकार अपने खर्च पर बनवाएगी। दूरी पांच किलोमीटर से ज्यादा होने पर अतिरिक्त खर्च संबंधित उच्च शिक्षा संस्थान को वहन करना होगा।
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स्वतंत्र फीडर के जरिये बिजली का इस्तेमाल करने वाले उच्च शिक्षा संस्थानों की बिलिंग निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों अथवा गैर औद्योगिक बल्क लोड श्रेणी की दरों पर होगी।
रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के संस्थापक आजम खां ने बीती 29 अगस्त को प्रमुख सचिव ऊर्जा और पावर कार्पोरेशन के चेयरमैन संजय अग्रवाल को पत्र भेजा था।
पत्र में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश की दयनीय स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा है कि आधारभूत संरचना और सुविधाओं के मामले में उच्च शिक्षा उदासीनता और उपेक्षा का शिकार है।
यहां के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राएं मात्र आधारभूत सुविधाओं के अभाव में अन्य बेहतर जगहों पर पलायन करने को विवश हैं।
आजम ने अपनी चिट्ठी में जोर दिया है कि विश्वविद्यालय परिसर में स्थित तकनीकी प्रयोगशाला, उच्च गुणवत्तायुक्त पुस्तकालय आदि के लिए लगातार बिजली आपूर्ति जरूरी है ताकि छात्रों को अनुकूल माहौल मिल सके।
उच्च शिक्षा को उच्च तकनीकीयुक्त तथा सुविधासंपन्न बनाने पर जोर देते हुए आजम का कहना था कि इसमें विलंब होगा उतना ही प्रदेश के संभावनाशील प्रतिभाशाली युवा वर्ग को नुकसान होगा।
आजम ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों में लगातार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कैबिनेट के समक्ष प्रस्ताव रखने को कहा था।
आजम का पत्र मिलने के बाद कार्पोरेशन प्रबंधन हरकत में आया। नियामक आयोग द्वारा तैयार कराए गए बाईलॉज का परीक्षण के बाद पाया गया कि इसके लिए कैबिनेट की मंजूरी जरूरी नहीं है।
विद्युत वितरण संहिता 2005 के प्रावधानों के तहत पावर कार्पोरेशन निदेशक मंडल ही इस बारे में निर्णय कर सकता है। आजम के इस पत्र को लेकर कार्पोरेशन केअधिकारियों ने मुख्य सचिव जावेद उस्मानी के साथ भी मंथन किया।
पेंच स्वतंत्र फीडर तैयार कराने में आने वाली लागत का फंस रहा था। रास्ता यह निकाला गया कि प्राथमिक उपकेंद्र से विश्वविद्यालय तक पांच किमी लंबाई का फीडर बनाने में आने वाला खर्च शासन वहन करेगा।
यह लागत 80 लाख से एक करोड़ रुपये के बीच होगी। पांच किलोमीटर से ज्यादा लंबे फीडर पर होने वाला अतिरिक्त खर्च विवि वहन करेगा। फीडर पर होने वाले खर्च का वहन उच्च शिक्षा विभाग करेगा।
शासन की हरी झंडी मिलने के बाद 3 अक्तूबर को हुई पावर कार्पोरेशन के चेयरमैन संजय अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई निदेशक मंडल की बैठक में विश्वविद्यालयों को 220/132 केवी उपकेंद्र से उनके भार के अनुसार 132/33 केवी स्वतंत्र फीडर के माध्यम से अनवरत बिजली आपूर्ति करने को हरी झंडी दे दी गई है।
विश्वविद्यालयों द्वारा स्वतंत्र फीडर के लिए आवेदन करने के बाद उच्च शिक्षा विभाग को इस्टीमेट भेजा जाएगा और पैसा स्वीकृत होते ही अलग फीडर बनाकर आपूर्ति की जाएगी।
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