प्रदेश में अटल आवासीय विद्यालय के निर्माण के लिए कोई भी ठेकेदार आगे नहीं आया है। तय तिथि तक सिर्फ राजकीय निर्माण निगम ने टेंडर डाला, पर निगम टेंडर की शर्तों को पूरा नहीं करता। वैसे भी पहली बार में सिंगल टेंडर स्वीकार नहीं किया जा सकता। लोक निर्माण विभाग ने दुबारा टेंडर जारी करते हुए इसके लिए आखिरी तिथि 11 जनवरी कर दी है।
करीब 40 साल बाद पीडब्ल्यूडी को भवन निर्माण के इतने बड़े काम मिले हैं। उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम के बनने के बाद से पीडब्ल्यूडी सरकारी गेस्ट हाउस के निर्माम व रखरखाव तक ही सीमित था। सरकार ने हर मंडल मुख्यालय पर अटल आवासीय विद्यालय के निर्माण के फैसले के साथ ही यह जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी को दी। एक विद्यालय के भवन की लागत औसतन 58.66 करोड़ रुपये है। शासनादेश के मुताबिक, पीडब्ल्यूडी ने ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) मोड में टेंडर आमंत्रित किए। इसके लिए आखिरी तिथि 23 दिसंबर दी गई थी। इसमें यह भी शर्त थी कि टेंडर डालने वाली फर्म को ईपीसी मोड में कार्य करने का अनुभव हो।
ईपीसी मोड में काम की स्टेज के आधार पर ठेकेदार को भुगतान करने का प्रावधान है। ये स्टेज प्लिंथ लेवल, स्लैब (लिंटर) और फिनिशिंग के आधार पर तय होती हैं। अभी तक की व्यवस्था के अनुसार, जितना काम हुआ, उसके अनुसार ठेकेदार को भुगतान कर दिया जाता था। बताते हैं कि ईपीसी मोड में काम करने के लिए कोई भी फर्म तैयार नहीं है। राजकीय निर्माण निगम को ईपीसी मोड में काम करने का अनुभव नहीं है, इसलिए उसका टेंडर तकनीकी बिड में ही बाहर करना पड़ता।
पीडब्ल्यूडी सूत्रों के मुताबिक, ईपीसी मोड में काम करने का अनुभव बड़ी फर्मों को है। वे 500 करोड़ रुपये से ऊपर की किसी परियोजना में काम करना चाहती है। यही वजह है उनमें से किसी ने अटल आवासीय विद्यालयों के निर्माण के लिए टेंडर नहीं डाला। अगर 11 जनवरी तक भी कोई टेंडर नहीं आया तो नियम-शर्तें बदलने के लिए शासन से बात करनी होगी। पीडब्ल्यूडी के विभागाध्यक्ष राजपाल सिंह ने बताया कि प्रयास है कि टेंडर डालने के लिए फर्में आगे आएं। इस बारे में कुछ भी कह पाने के लिए अंतिम तिथि तक की स्थिति का इंतजार करना होगा।