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अब निजी कोविड अस्पताल चुनने में उखड़ रहीं सांसें

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कोविड मरीज परेशान नहीं मिले रहे निजी अस्पतालों में बेड। - फोटो : ??? ?????
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फैजुल्लागंज में श्याम बिहार कॉलोनी की प्रिया पटेल (45) को करीब दस दिन से बुखार आ रहा था। पहले नजदीकी नॉन कोविड अस्पताल में भर्ती होकर इलाज करा रही थीं।
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कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आने बाद निजी अस्पताल ने इलाज से मना कर दिया। तीन दिन से तीमारदार निजी कोविड अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे, मगर भर्ती न किए जाने से शनिवार सुबह उनकी जान चली गई।
फैजुल्लागंज के 50 वर्षीय नासिर को चार दिन पहले बुखार आया। रिपोर्ट पॉजिटिव होने पर बंधा रोड निजी कोविड अस्पताल में भर्ती कराया।
आरोप है वहां ऑक्सीजन खत्म होने के बाद मरीज को घर भेज दिया गया। परिवारीजन जिला प्रशासन से लेकर कई अधिकारियों से निजी कोविड अस्पताल के लिए गुहार लगाते रहे।
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मगर भर्ती न होने से शनिवार को उनकी भी जान चली गई। घरवालों का कहना है कि नॉन कोविड निजी अस्पताल में कहां बेड खाली हैं, इसकी जानकारी तक नहीं हो पाई।
जानकीपुरम की अर्चना सिंह (29) की तीन दिन पहले कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई। ऑक्सीजन लेवल गिरने से वह लगातार निजी कोविड अस्पताल में भर्ती होने के लिए प्रयास कर रही हैं। हालांकि, अभी तक भर्ती न किए जाने से उनकी हालत लगातार बिगड़ रही है।
कोरोना पॉजिटिव डालीगंज के बाबूगंज की सरोजनी देवी (55) बेड के लिए तीन दिन भटकती रहीं। कोविड कमांड सेंटर से भी संपर्क किया। परिवारवाले पूरे दिन निजी वाहन में उन्हें लेकर भटकते रहे। निजी कोविड अस्पताल में बेड न मिलने से उनकी मौत हो गई।
राजधानी में बढ़ते संक्रमण के बीच कोरोना मरीजों को राहत देनेे के स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन के तमाम दावों की ये मामले पोल खोल रहे हैं।
निजी अस्पतालों में कोविड मरीजों की भर्ती के लिए रेफरल लेटर की अनिवार्यता खत्म होने के बाद राहत मिलना तो दूर संकट और बढ़ गया है।
पहले तो कमांड सेंटर से रेफर किए जाने के कारण मरीज को अस्पताल व उनमें उपलब्ध बेड की जानकारी मिल जाती थी। अब तो तीमारदारों का कहना है कि अस्पताल के गेट पर पहुंचने पर पता चलता है कि वहां कोई व्यवस्था नहीं है।
राजधानी के निजी कोविड अस्पतालों में ऑक्सीजन व बेड का बड़ा संकट है। ऐसे में संक्रमितों को राहत नहीं मिल पा रही है। वे तीमारदार के साथ एक से दूसरे अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं।
इस दौरान कई मरीजों की जान भी जा रही है। गौरतलब है कि पहले अस्पतालों में भर्ती करने के लिए सीएमओ का पत्र जरूरी था। रेफरल लेटर मिलने में देरी के चलते कई मरीजों की जान तक जा रही थी।
इसे देखते हुए यह बाध्यता खत्म की गई। हालांकि, अब भी निजी कोविड अस्पताल मरीजों को भर्ती नहीं कर रहे हैं। मामले को लेकर सीएमओ का कहना है कि समस्या को जल्द दूर किया जाएगा।
अस्पताल नहीं दे रहे बेड की जानकारी
शासन के निर्देश के बावजूद केजीएमयू, बलरामपुर, लोकबंधु समेत कई निजी कोविड अस्पतालों ने अब तक अपने गेट पर बेडों की स्थिति और ऑक्सीजन की उपलब्धता का रिकॉर्ड चस्पा नहीं किया है। ऐसे में मरीज लेकर दिनभर एक से दूसरे अस्पताल की दौड़ लगा रहे तीमारदारों को निजी कोविड अस्पताल का चयन करने में खासी दिक्कत आ रही है। शनिवार शाम को सिर्फ कैरियर हॉस्पिटल में मरीजों की लिस्ट व ऑक्सीजन की उपलब्धता का ब्योरा गेट पर चस्पा किया गया है।
95 फीसदी अस्पतालों में ऑक्सीजन का संकट
राजधानी के निजी कोविड अस्पतालों में ऑक्सीजन सिस्टम वेंटिलेटर सपोर्ट पर पहुंच गया है। हर अस्पताल दो से चार घंटे के बैकअप पर चल रहा है। ऐसे में नए मरीजों की भर्ती भी नहीं हो पा रही है। जिला प्रशासन के अधिकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी दूर नहीं करा पा रहे हैं। इसका खामियाजा कोरोना के उन गंभीर मरीजों को भुगतना पड़ रहा है जिन्हें ऑक्सीजन की सख्त जरूरत है और अस्पताल उन्हें लेने को तैयार नहीं है। 95 प्रतिशत से अधिक निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन का संकट है।
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